काठमांडू: नेपाल में पिछले साल हुए जनरेशन Z के भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के महीनों बाद अब मार्च में चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। नेपाल में नई सत्ता की कुर्सी हासिल करने की इस दौड़ में अब तक चार पूर्व प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से नामांकन पत्र दाखिल किया है। इससे 2026 का नेपाल इलेक्शन काफी रोचक होने के संकेत मिल रहे हैं। बता दें कि नेपाल में आम चुनाव आगामी 5 मार्च को होना तय किया गया है।
कौन-कौन पूर्व पीएम हैं नेपाल के नये प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में
नेपाल के 4 पूर्व प्रधानमंत्री इस बार सत्ता पाने की आस में अपनी किस्मत आजमाने मैदान में उतर गए हैं। इनमें नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) के अध्यक्ष और अपदस्थ प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली प्रमुख हैं। वह झापा-5 से चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल 'प्रचंड' ने रुकुम पूर्व से नामांकन दाखिल किया है। वहीं दो अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के माधव कुमार नेपाल और प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के बाबूराम भट्टराई ने क्रमशः रौतहट-1 और गोरखा-2 निर्वाचन क्षेत्रों से नामांकन दाखिल किए हैं।
शेर बहादुर देउबा और झाला नाथ दौड़ से बाहर
नेपाल में होने वाले आम चुनाव में 4 पूर्व प्रधानमंत्री इस बार भी दौड़ में हैं, वहीं 2 अन्य पूर्व प्रधानमंत्री...नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता झाला नाथ खनाल इस दौड़ से बाहर हैं। बता दें कि केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर को युवा-नेतृत्व वाले जनरेशन Z समूह के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए इसके बाद नेपाल में आम चुनाव जरूरी हो गए।
नेपाल में क्यों जेन जेड ने किया था आंदोलन
नेपाल में पिछले साल सितंबर में जनरेशन Z युवाओं के विद्रोह का एक मुख्य कारण भ्रष्टाचार का विरोध करना था। जनरेशन Z युवा बदलाव चाहते थे और उन्होंने संकेत दिया कि वे पुरानी नेतृत्व से तंग आ चुके हैं। नेपाल के एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि गत 15 वर्षों में तीन शीर्ष नेता शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल प्रचंड और केपी शर्मा ओली द्वारा प्रधानमंत्री पद को संगीत कुर्सी खेल की तरह बारी-बारी से हथियाते रहे। उन्होंने कहा कि हमारे पास ये चार नेता ऐसे हैं जो सभी 70 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। ओली 74 वर्ष के हैं, प्रचंड और भट्टराई दोनों 71 वर्ष के, और माधव कुमार नेपाल 72 वर्ष के हैं। इस बार चुनाव नहीं लड़ने वाले दो पूर्व प्रधानमंत्रियों में से खनाल ने स्वेच्छा से दौड़ से दूर रहना चुना, लेकिन देउबा को अपनी ही पार्टी में युवा नेताओं के विद्रोह के कारण बाहर रहना पड़ा।
शेऱ बहादुर देउबा ने क्यों नहीं लड़ा चुनाव
शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक धनंजय शर्मा ने कहा कि पूर्व पीएम देउबा दादेलधुरा निर्वाचन क्षेत्र से आठवीं बार चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गगन थापा ने अंततः उन्हें जनरेशन Z की भावनाओं के अनुरूप चुनाव से दूर रहने के लिए मनाया। वहीं देश भर से तीन मेयरों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा देकर चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने का फैसला किया है। तीनों में प्रमुख और लोकप्रिय पूर्व काठमांडू महानगरीय सिटी के मेयर बालेंद्र शाह 'बालेन' हैं, जिन्होंने पूर्वी नेपाल के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए पद छोड़ दिया। अन्य दो हैं: धरान उप-महानगरीय सिटी के मेयर हरका सम्पांग, जो सुनसरी-1 से चुनाव लड़ रहे हैं, और प्रचंड की बेटी रेणु दाहाल, जो भरतपुर महानगरीय सिटी की मेयर थीं और अब चितवन-3 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं।
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