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स्विट्जरलैंड: World Economic Forum में विश्व नेताओं ने ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप को घेरा, टैरिफ...टेरर और WAR पर फोकस

Global leaders gather at World Economic Forum in Switzerland strongly criticize the US over Greenland now await Trump

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Jan 21, 2026 12:58 pm IST, Updated : Jan 21, 2026 01:05 pm IST
स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम।- India TV Hindi
Image Source : AP स्विट्जरलैंड में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम।

दावोस: स्विट्जरलैंड में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (विश्व आर्थिक) मंच में ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका जबरदस्त तरीके से घिर गया है। यूरोपीय और नाटो देशों ने ग्रीनलैंड(ग्रेटलैंड) पर अमेरिका के जबरन कब्जे के प्रयासों को अवैध बताते हुए राष्ट्रपति ट्रंप पर कड़ा प्रहार किया है। इस सम्मेलन में बुधवार को ट्रंप के भी पहुंचने की उम्मीद है। मगर उनके आने से पहले ही विश्व नेताओं ने अमेरिका को ग्रीनलैंड के मामले पर अंतरराष्ट्रीय कठघरे में खड़ा कर दिया है। इधर खबर है कि ट्रंप भी इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए दावोस जा रहे हैं, जहां उन्हें विश्व नेताओं से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। 

ट्रंप के सामने दावोस में भारी मुश्किल

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को स्विस आल्प्स में विश्व आर्थिक मंच पर जा रहे हैं, जहां नाटो सहयोगी डेनमार्क से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की उनकी महत्वाकांक्षा यूरोपीय सहयोगियों के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है और वैश्विक अभिजात वर्ग की इस सभा में उनकी मूल योजना घरेलू स्तर पर किफायती जीवन की समस्याओं पर चर्चा को प्रभावित कर सकती है। बता दें कि  ट्रंप दावोस में अंतरराष्ट्रीय मंच पर तब पहुँच रहे हैं, जब उन्होंने डेनमार्क और सात अन्य सहयोगियों पर टैरिफ की धमकी दी है। इससे वह यूरोपीय देशों से घिर गए हैं। दावोस सम्मेलन में पहुंचने से पहले ट्रंप ने कहा है कि अगले महीने टैरिफ 10% से शुरू होंगे और जून तक 25% तक बढ़ जाएंगे। ट्रंप ने यह टैरिफ ग्रीनलैंड पर अमेरिकी रुख का समर्थन नहीं करने वाले देशों पर लगाने का ऐलान किया है। 

दावोस जाने से पहले ट्रंप का बयान

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सप्ताह यूरोपीय अधिकारियों के बीच प्रसारित एक टेक्स्ट संदेश में भी ग्रीनलैंड पर अपनी आक्रामक रुख को पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से जोड़ा। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री योहनास गाहर स्टोर से कहा कि अब उन्हें "केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता नहीं" महसूस होती। अब दावोस में अमेरिका के लंबे समय के सहयोगियों के साथ उसके संबंधों की असामान्य परीक्षा की घड़ी है। स्विट्जरलैंड में ट्रंप 2 दिन रहेंगे। इन दो दिनों में क्या होगा, यह अनिश्चित लग रहा है।  हलांकि ट्रंप ने मंगलवार शाम को व्हाइट हाउस से दावोस के लिए उड़ान भरते समय रिपोर्टर्स से कहा-"यह एक रोचक यात्रा होगी। ट्रंप ने कहा कि "मुझे नहीं पता क्या होने वाला है, लेकिन आप अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व किए जा रहे हैं।"  वास्तव में, उनकी दावोस यात्रा मुश्किल शुरुआत से हुई। एयर फोर्स वन पर एक मामूली इलेक्ट्रिकल समस्या आई, जिसके कारण क्रू ने सावधानी के तौर पर उड़ान के लगभग 30 मिनट बाद विमान को वापस मोड़ लिया और राष्ट्रपति की स्विट्जरलैंड पहुंच में देरी हो गई।  

ग्रीनलैंड मामले पर टैरिफ को लेकर भी ट्रंप की खिंचाई

ग्रीनलैंड पर अमेरिकी रुख का समर्थन नहीं करने वाले देशों पर ट्रंप के टैरिफ के ऐलान ने भी उनके सामने दावोस में कड़ी चुनौती पेश की है। ट्रंप के दावोस आगमन से पहले यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप टैरिफ आगे बढ़ाते हैं तो ब्लॉक की प्रतिक्रिया "अटल, एकजुट और आनुपातिक" होगी। उन्होंने संकेत दिया कि ट्रंप की नई टैरिफ धमकी इस गर्मियों में हासिल किए गए अमेरिका-यूरोपीय संघ व्यापार ढांचे को भी कमजोर कर सकती है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने कड़ी मेहनत से सील किया था। वॉन डेर लेयेन ने दावोस में कहा कि यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले जुलाई में एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रंप दावोस में आवास पर क्यों बात करना चाह रहे हैं ?

दावोस में किन मुद्दों पर वार्ता चाहते हैं ट्रंप

ट्रंप ने कहा है कि वे दावोस में अपनी उपस्थिति का उपयोग आवास को अधिक सुलभ बनाने और अन्य किफायती मुद्दों पर बात करने के लिए करेंगे, जो अमेरिकियों के लिए शीर्ष प्राथमिकताएं हैं। कैटो इंस्टीट्यूट में लिबर्टेरियन थिंक टैंक के आर्थिक मुद्दों के उपाध्यक्ष और टैरिफ आलोचक स्कॉट लिंसिकोम ने कहाकि ग्रीनलैंड पर ट्रंप की  टैरिफ धमकी यदि पिछले साल अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच हासिल व्यापार युद्धविराम को तोड़ देती है तो यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है। लिंसिकोम ने कहा कि लंबे समय में निवेशकों के अमेरिकी अर्थव्यवस्था में विश्वास को काफी कमजोर करना संभावित रूप से ब्याज दरों को बढ़ाएगा और इस तरह घरों को कम किफायती बना देगा। यह ट्रंप के लिए झटका होगा। वहीं  ट्रंप ने मंगलवार को यूरोप को आगामी नए टैरिफ के लिए जवाबी कार्रवाई न करने की चेतावनी भी दी कि "वे हमारे साथ जो भी करेंगे, मैं बस उसका जवाब दूंगा।" 

दावोस में ये मुद्दे भी रहेंगे चर्चा के केंद्र में

दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ग्रीनलैंड और ट्रंप के टैरिफ के अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका तनाव और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी चर्चा संभव है। फिलहाल विश्व नेताओं ने ग्रीनलैंड के मामले पर अमेरिका की जबरदस्त खिंचाई की है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के दावोस आने से पहले ही उनका नाम लिए बिना बड़ा हमला बोला। कार्नी ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कहा कि विश्व में नियम आधारित व्यवस्था मर चुकी है। उन्होंने अमेरिका का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि शक्तिशाली देश कमजोर व मध्यम शक्ति वाले देशों की संप्रभुता पर आक्रमण कर रहे हैं। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मौक्रों ने भी ट्रंप को निशाने पर लिया। उन्होंने ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले देशों पर ट्र्ंप द्वारा 10 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले को गलत ठहराया। साथ ही ग्रीनलैंड पर अमेरिकी ज्यादती के खिलाफ नाटो और यूरोपीय देशों की एकजुटता की प्रतिबद्धता जाहिर की। 

दावोस में भारत की ओर से कौन शामिल हुआ

दावोस विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 56वीं वार्षिक बैठक में भारत ने इस बार अब तक का सबसे बड़ा और विविध प्रतिनिधिमंडल भेजा है, जिसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई मुख्यमंत्रियों और 100 से अधिक प्रमुख सीईओ शामिल हैं। रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव सबसे प्रमुख वक्ताओं में से एक हैं। उन्होंने AI और टेक्नोलॉजी पर पैनल में भाग लिया और कहा कि बड़े मॉडल बनाने से देश को शक्ति नहीं मिलती, बल्कि ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) और सबसे कम लागत वाली समाधानों से उच्च रिटर्न पर फोकस करना जरूरी है। उन्होंने "5th Industrial Revolution" की अर्थव्यवस्था पर जोर दिया। वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत की AI अप्रोच (समावेशी, स्केलेबल और डेमोक्रेटाइज्ड) पर वैश्विक स्तर पर बहुत उत्सुकता है। भारत "विश्व का विश्वसनीय भागीदार" है, और PM मोदी के नेतृत्व में आर्थिक विकास, टेक्नोलॉजी और समावेशी विकास चर्चा का केंद्र है। उन्होंने व्यापार वार्ताओं को दावोस का मुख्य फोरम न बताते हुए कहा कि भारत सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

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