बॉलीवुड में नाम, चेहरा और विरासत सब कुछ होने के बावजूद हर किसी की किस्मत एक जैसी नहीं होती। कुछ सितारे एक किरदार से इतिहास रच देते हैं, लेकिन उनकी अगली पीढ़ी के लिए वही रास्ता आसान नहीं होता। ऐसा ही एक किस्सा जुड़ा है 'बॉर्डर' के मथरादास यानी अभिनेता सुदेश बेरी और उनके बेटे सूरज बेरी से, जहां पिता ने सिनेमा और टेलीविजन दोनों में अपनी मजबूत पहचान बनाई, वहीं बेटे का सफर उम्मीदों और हकीकत के बीच उलझता चला गया। सुदेश की तरह ही उनके बेटे सूरज बेरी भी हैंडसम हंक है और गुड लुक्स के मामले में वरुण धवन और अहान शेट्टी जैसे नए एक्टर्स को फेल करते हैं। इसते बावजूद बॉलीवुड में उनकी दाल नहीं गली और उन्होंने अपने लिए नया और इज्जतदार करियर चुना और आज एक बड़े अधिकारी हैं।
पिता की पहचान का नहीं मिला फायदा
सुदेश बेरी को दर्शक आज भी 1997 की आइकॉनिक फिल्म ‘बॉर्डर’ में निभाए गए मथुरा दास के किरदार और टीवी शो ‘सुराग’ के तेज-तर्रार इंस्पेक्टर भारत के रूप में याद करते हैं। ‘सुराग’ का किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि वह सुदेश बेरी की पहचान बन गया। फिल्मों और टीवी में लगातार काम के चलते उन्होंने 90 के दशक में मजबूत स्टारडम हासिल किया, लेकिन यही पहचान सूरज बेरी के लिए दोधारी तलवार बन गई। इंडस्ट्री के भीतर उनसे उम्मीदें कहीं ज्यादा थीं, मगर मौके उतने ठोस नहीं निकले। लुक्स और पर्सनैलिटी के मामले में सूरज किसी भी स्टारकिड से कम नहीं थे, फिर भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और इससिए ही उन्होंने नई राह चुनी।
अधूरा डेब्यू और टूटते सपने
सूरज बेरी का जन्म मुंबई में हुआ और यहीं से उनकी पढ़ाई-लिखाई भी हुई। आर्य विद्या मंदिर स्कूल और बाद में मीठीबाई कॉलेज में पढ़ते हुए उनके मन में एक्टिंग का सपना आकार लेने लगा। पिता का फिल्मी माहौल और सेट्स की दुनिया देखकर अभिनय की चाह और गहरी हो गई। सूरज को पहला बड़ा मौका फिल्म ‘द लिटिल गॉडफादर’ से मिला, जो 7/11 मुंबई ट्रेन बम धमाकों पर आधारित थी। फिल्म को एकता कपूर और सुनील शेट्टी जैसे बड़े नाम प्रोड्यूस कर रहे थे, जिससे उम्मीदें और भी बढ़ गई थीं। शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन अचानक फिल्म बंद कर दी गई। यह झटका सूरज के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं था। इसके बाद उन्होंने और भी प्रोजेक्ट्स साइन किए, मगर दुर्भाग्यवश वे फिल्में भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सकीं। एक के बाद एक टूटते सपनों ने सूरज को अंदर से तोड़ दिया।
जब देश छोड़ा, तब नई राह मिली
लगातार असफलताओं के बाद सूरज ने एक बड़ा फैसला लिया भारत छोड़ने का। वह ऑस्ट्रेलिया चले गए और वहां अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देने की कोशिश की। उन्होंने प्रोफेशनल अकाउंटिंग में मास्टर्स किया और साथ ही एक्टिंग से जुड़ा एक कोर्स भी किया, ताकि अपने सपने से पूरी तरह न कटें। यहीं उनकी जिंदगी ने एक अप्रत्याशित मोड़ लिया। सूरज ऑस्ट्रेलिया के एक मैक्सिमम सिक्योरिटी प्रिजन में प्रिजन ऑफिसर यानी जेल अधिकारी बन गए। पिछले 4-5 सालों से वह जेल अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं, एक ऐसा प्रोफेशन, जिसकी कल्पना शायद उन्होंने कभी नहीं की थी।
सपना अब भी जिंदा है
हालांकि सूरज बेरी ने एक्टिंग से पूरी तरह नाता नहीं तोड़ा है। साल 2025 में उन्होंने खुलकर बताया कि वह फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर वापसी की कोशिश कर रहे हैं और ऑडिशन भी दे रहे हैं। उनके पिता सुदेश बेरी भी सोशल मीडिया पर बेटे के लिए समर्थन जताते रहते हैं। सूरज खुद भी इंस्टाग्राम पर एक्टिव हैं, जहां उनका ट्रांसफॉर्मेशन और कॉन्फिडेंस साफ नजर आता है।
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