सर्दियों का मौसम आते ही गाजर का हलवा लगभग हर घर में बनने लगता है। ठंड में गरमागरम गाजर का हलवा खाने में बहुत ही मजेदार लगता है। लाल गाजर, देसी घी, दूध और चीनी से बना यह व्यंजन स्वाद में भले ही लाजवाब हो, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह सेहत से जुड़ी परेशानी का कारण भी बन सकता है। खासकर डायबिटीज, हृदय रोग, मोटापा और फैटी लिवर से जूझ रहे मरीजों को गाजर का हलवा सोच-समझकर खाना चाहिए।
गाजर का हलवा खाने के नुकसान
डॉक्टर आलोक जोशी (जोशी डायबिटीज एंड हार्ट क्लिनिक, रोहिणी) ने बताया कि गाजर अपने आप में पोषक तत्वों से भरपूर होती है, लेकिन जब इसमें ज्यादा मात्रा में चीनी, मावा और घी मिलाया जाता है, तो यह हाई कैलोरी और हाई शुगर फूड बन जाता है। डायबिटीज़ के मरीजों में गाजर का हलवा ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है, जिससे शुगर अनकंट्रोल हो सकती है। इसी तरह ज्यादा घी और मावा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।
गाजर का हलवा किसे नहीं खाना चाहिए?
इसके अलावा, गाजर का हलवा नियमित या अधिक मात्रा में खाने से वजन बढ़ने की संभावना रहती है। मोटापा खुद में हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं को जन्म देता है। पाचन कमजोर होने या एसिडिटी की समस्या वाले लोगों को भी इसे खाने के बाद भारीपन, गैस और अपच की समस्या हो सकती है।
कितनी मात्रा में खा सकते हैं गाजर का हलवा
इसका मतलब यह नहीं कि गाजर का हलवा पूरी तरह से जहर है, लेकिन इसे “सेहतमंद” समझकर बिना सीमा के खाना नुकसानदायक हो सकता है। अगर खाना ही हो, तो कम मात्रा में, कम चीनी और कम घी के साथ और वह भी कभी-कभार ही खाएं। डायबिटीज या हार्ट के मरीज हैं तो आपको इससे बिल्कुल परहेज करना चाहिए। किसी भी मीठे व्यंजन को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)