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बांग्लादेश में अब क्या हो गया?...जिससे भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने की तैयारी में है MEA

 Published : Jan 21, 2026 10:58 am IST,  Updated : Jan 21, 2026 10:58 am IST

बांग्लादेश में लगातार बढ़ रही हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हिंसक घटनाओं के मद्देनजर भारतीय विदेश मंत्रालय ने ढाका में मौजूद अपने राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : AP

नई दिल्ली: बांग्लादेश के हालात करीब 1 साल से लगातार खराब ही होते जा रहे हैं। इस दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में जबरदस्त तनाव आया है। हालात यह हो गए हैं कि बांग्लादेश में अब सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि भारतीय राजनयिक और उनके परिवार तक सुरक्षित नहीं हैं। इसलिए भारतीय विदेश मंत्रालय अपने राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने की तैयारी में हैं।

चरमपंथी गतिविधियां बढ़ने के चलते बढ़ी चिंता

बांग्लादेश में लगातार चरमपंथी और कट्टरपंथी गतविधियां बढ़ती जा रही हैं। इन घटनाओं ने एमई को चिंता में डाल दिया है। लिहाजा अब भारत ने बांग्लादेश में तैनात अपने अधिकारियों के परिवारों और आश्रितों को वापस बुलाने का फैसला किया है। एमई ने  यह कदम बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने से कुछ सप्ताह पहले उठाया है। बांग्लादेश में "असुरक्षा की स्थिति को देखते हुए सावधानी के तौर पर उच्चायोग और अन्य पदों पर तैनात भारतीय अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी  गईहै।"

क्या भारत बंद करेगा बांग्लादेश में मिशन

बांग्लादेश में चल रहे भारतीय मिशन फिलहाल चलते रहेंगे। अधिकारियों की तैनाती भी रहेगी। लिहाजा "नॉन-फैमिली" पोस्टिंग सबसे सख्त सुरक्षा उपायों में से एक है। यह आमतौर पर ऐसे देश या स्थान पर लागू की जाती है, जिसे अस्थिर या खतरनाक माना जाता है।  यह स्पष्ट नहीं है कि अधिकारियों के परिवार कब वापस लौटेंगे और क्या वे भारत लौटेंगे।  ढाका में उच्चायोग के अलावा, भारत के राजनयिक पद चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में हैं।  भारत-बांग्लादेश संबंध तब से तनावपूर्ण हो गए हैं, जब 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में आई। 

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती जा रही हिंसा

हाल के विरोध प्रदर्शनों के बीच दोनों पक्षों ने अपने मिशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। छात्र नेता शरीफ ओसमान हादी की 12 दिसंबर को मौत के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में भी तेजी आई है।  भारत ने हिंसा पर चिंता जताई और बांग्लादेश से सांप्रदायिक घटनाओं से कड़ा निपटने का आह्वान किया।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम अल्पसंख्यकों तथा उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा बार-बार होने वाले हमलों का चिंताजनक पैटर्न देख रहे हैं।"  नई दिल्ली ने बांग्लादेश की इस "चिंताजनक प्रवृत्ति" पर प्रकाश डाला कि ऐसी हिंसा को व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक मतभेद या अन्य बाहरी कारणों से जोड़ा जाता है।

इसे रेखांकित करते हुए जायसवाल ने कहा कि "ऐसी उपेक्षा केवल अपराधियों को और हौसला देती है" और अल्पसंख्यकों में डर व असुरक्षा को और बढ़ाती है। उन्होंने कहा, "हमने पहले के ब्रीफिंग में इस मुद्दे को बार-बार उठाया है और बांग्लादेश में चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों, उनके घरों और व्यवसायों पर बार-बार होने वाले हमलों का चिंताजनक पैटर्न जारी देख रहे हैं।"

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