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'गाजा पीस प्लान' को लेकर पाकिस्तान में मचा बवाल, शहबाज शरीफ और असीम मुनीर का विरोध हुआ तेज

 Published : Oct 09, 2025 11:18 pm IST,  Updated : Oct 09, 2025 11:18 pm IST

गाजा शांति प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक घमासान मच गया है। गाजा पीस प्लान को शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर के समर्थन से धार्मिक नेता नाराज हैं, दोनों पर आरोप है कि उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ फैसला लिया है।

पाकिस्तान में TLP...- India TV Hindi
पाकिस्तान में TLP कार्यकर्ता गाजा पीस प्लान को लेकर बवाल मचा रहे हैं। Image Source : AP

इस्लामाबाद: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तुत किए गए गाजा शांति प्रस्ताव का पहला चरण लागू हो चुका है, जिसे हमास ने भी मंजूर कर लिया है। हालांकि, गाजा में शांति लाने की कोशिश पर देखी जा रही इस योजना के लागू होने के बीच पाकिस्तान में घोर अशांति मचती दिख रही है। दरअसल, शहबाज शरीफ की सरकार और सेना के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने ट्रंप के शांति प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन इससे पाकिस्तान में मौलानाओं का गुस्सा बढ़ गया है।

'शहबाज और मुनीर ने मुसलमानों को दिया धोखा'

पाकिस्तान के धार्मिक नेता, खासकर मौलाना, शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने मुसलमानों को धोखा दिया है। उनका कहना है कि ये लोग फिलिस्तीन के संघर्ष को नजरअंदाज कर रहे हैं और इजरायल को मान्यता देने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस विरोध के बीच, तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) के नेता मौलाना साद रिज़वी ने इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास का घेराव करने की धमकी दी है, जिसे लेकर पाकिस्तान में माहौल और भी गर्मा गया है।

लाहौर में पुलिस और TLP कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर शहर में, शहबाज शरीफ की पुलिस ने तहरीक-ए-लब्बैक के मुख्यालय पर हमला किया। पुलिस ने रात के अंधेरे में इस्लामाबाद मार्च की तैयारी कर रहे TLP के कार्यकर्ताओं पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। प्रदर्शनकारियों ने जब पुलिस का विरोध किया, तो पुलिस को पीछे हटना पड़ा। यह झड़पें तब और बढ़ गईं, जब TLP के समर्थकों ने पुलिस पर पलटवार करते हुए उन्हें लाहौर की मस्जिद रहमत अली में कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर कर दिया।

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Image Source : APपाकिस्तान के मौलाना प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर से बुरी तरह खफा हैं।

मस्जिद रहमत अली में हिंसक प्रदर्शन की खबर

TLP के कार्यकर्ताओं का कहना है कि शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर ने ट्रंप के प्रस्ताव को स्वीकार कर पाकिस्तान के मुसलमानों की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। उनका आरोप है कि यह शांति समझौता फिलिस्तीन के अस्तित्व को खत्म कर देगा और पाकिस्तान के मुस्लिम समुदाय को इस धोखे के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है। बताया जा रहा है कि लाहौर की मस्जिद रहमत अली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिड़ंत के बाद, कई लोग घायल हुए और कुछ की जान जाने की भी खबरें हैं।

पुलिस ने नहीं किया मरने वालों की संख्या का खुलासा

TLP समर्थकों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि सरकार फिलिस्तीन के साथ पाकिस्तान के ऐतिहासिक समर्थन को नजरअंदाज करके सिर्फ इजरायल को मान्यता देने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि उन्हें गोली मारी जा रही है, जबकि वे केवल फिलिस्तीन के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। इस हिंसा में TLP के 3 कार्यकर्ताओं के मारे जाने की खबरें हैं, हालांकि पुलिस ने मरने वालों की संख्या का खुलासा नहीं किया है। TLP समर्थकों ने गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि वे इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास का घेराव करेंगे और शांति प्रक्रिया का विरोध जारी रखेंगे।

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Image Source : APपाकिस्तान ने नोबेल प्राइज के लिए डोनाल्ड ट्रंप को नामांकित किया है।

अपनी सरकार के रुख से हैरान हैं पाकिस्तान के लोग

पाकिस्तान के नागरिक और धार्मिक नेता इस बात को लेकर बहुत हैरान हैं कि उनके देश की सरकार ने कैसे इजरायल के पक्ष में रुख बदला है। इसके विरोध में TLP की ओर से आक्रामक बयान दिए जा रहे हैं और आगामी जुमे के दिन इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास का घेराव की बात कही जा रही है। पाकिस्तान की सड़कों पर इस समय गुस्से की लहर देखी जा रही है। TLP के नेता और उनके समर्थक शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन रोकने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं बल्कि लगातार हिंसक होते जा रहे हैं।

...तो शहबाज और मुनीर ने ट्रंप के सामने इसलिए किया सरेंडर?

पाकिस्तान में लोग इसलिए भी भड़के हुए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जनरल मुनीर और शहबाज शरीफ ने अपनी सत्ता बचाने के लिए ट्रंप के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्हें लग रहा है कि हमेशा फिलिस्तीन का साथ देने वाला पाकिस्तान अब ट्रंप को खुश करने के लिए पलट गया। दूसरी ओर, ट्रंप इजरायल-हमास शांति समझौते को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं और नोबेल शांति पुरस्कार की उम्मीद लगाए हैं। पाकिस्तानी नेताओं ने उन्हें नामांकित भी किया, लेकिन ट्रंप को शक है कि कमेटी कोई बहाना बनाकर उन्हें पुरस्कार नहीं देगी।

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