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ईरान के साथ जंग के बीच चीन को भी संदेश! फिलीपींस के साथ बड़ा युद्धाभ्यास करेगा अमेरिका

 Published : Apr 14, 2026 06:21 pm IST,  Updated : Apr 14, 2026 06:21 pm IST

अमेरिका और फिलीपींस 20 अप्रैल से ‘बालिकातन’ सैन्य अभ्यास करेंगे, जिसमें 17,000 सैनिक शामिल होंगे। चीन को संदेश देने के उद्देश्य से इस सैन्य अभ्यास में जापान, फ्रांस और कनाडा भी हिस्सा लेंगे।

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अमेरिका और फिलीपींस के बीच इस साल एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। Image Source : AP

मनीला: एशिया में अपनी मजबूत मौजूदगी दिखाने के लिए अमेरिका और फिलीपींस के बीच इस साल एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि इस अभ्यास में दोनों देशों के 17,000 से ज्यादा सैनिक हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि अमेरिका इस सैन्य अभ्यास के जरिए इलाके का चौधरी बनने की कोशिश कर रहे चीन को भी संदेश देने की कोशिश कर रहा है। यह युद्धाभ्यास 20 अप्रैल से 8 मई तक चलेगा और इसे 'बालिकातन' नाम दिया गया है जिसका मतलब है 'कंधे से कंधा मिलाकर'।

चीन को एक मजबूत संदेश देने की कोशिश

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अभ्यास सीधे तौर पर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच एक मजबूत संदेश है। इस दौरान जापान की सेना भी शामिल होगी और फिलीपींस के उत्तर-पश्चिमी समुद्री इलाके में एक जहाज को मिसाइल से डुबाने का अभ्यास करेगी। यह इलाका विवादित दक्षिण चीन सागर के करीब है, जहां चीन लगभग पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करता है। फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इस समुद्री इलाके पर दावा करते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में चीन और फिलीपींस के बीच टकराव तेजी से बढ़ा है। बीते कुछ सालों में कई बार दोनों देशों के जहाज आमने-सामने आ चुके हैं।

चीन करता रहा है ऐसे सैन्य अभ्यासों का विरोध

इस बार के अभ्यास में फ्रांस और कनाडा की सेनाएं भी शामिल होंगी, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि चीन के खिलाफ क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ रहा है। अमेरिकी सेना के प्रवक्ता कर्नल रॉबर्ट बन्न ने कहा, 'हमारा संदेश साफ है, हम अपने सहयोगियों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि अभ्यास में ड्रोन हमलों से निपटने की तैयारी भी शामिल होगी। हालांकि, चीन पहले भी इस तरह के सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है, खासकर तब जब उसमें अमेरिका शामिल होता है। चीन का कहना है कि ऐसे अभ्यास क्षेत्र में तनाव बढ़ाते हैं।

फिलीपींस में हेगसेथ ने दिया था बड़ा बयान

फिलीपींस की सेना भले ही कहती है कि यह अभ्यास किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, लेकिन यह भी मानती है कि इससे विवादित समुद्री क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। पिछले साल पीट हेगसेथ ने मनीला दौरे के दौरान फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर को भरोसा दिलाया था कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर चीन की आक्रामक गतिविधियों का मुकाबला करेगा। हेगसेथ ने कहा था, 'दोस्तों को कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना चाहिए, ताकि संघर्ष को रोका जा सके और समुद्र में आवाजाही की आजादी बनी रहे, चाहे आप इसे दक्षिण चीन सागर कहें या पश्चिम फिलीपींस सागर।'

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