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शांति का मसीहा बनने चले थे शी जिनपिंग, इजरायल पर हमास के हमले ने यूं खोल दी पोल

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Oct 10, 2023 09:17 pm IST, Updated : Oct 10, 2023 09:17 pm IST

इजरायल पर हमास के हमले ने साल की शुरुआत से वैश्विक शांति का मसीहा बनने की कोशिशें कर रहे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सारे किए धरे पर पानी फेर दिया।

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Image Source : AP चीन की तरफ से हमास के हमले पर गोलमोल बयान आया है।

बीजिंग: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस साल की शुरुआत खुद के 'वैश्विक शांति का मसीहा' साबित करने की कोशिशों के साथ की थी। उन्होंने एक तरफ जहां रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर के लिए पहल की थी, वहीं दूसरी तरफ कट्टर दुश्मन देशों ईरान और सऊदी अरब के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित होने का रास्ता साफ कर दिया था। उनकी ये सारी कोशिशें काफी हद तक रंग भी ला रही थीं लेकिन इजरायल पर हमास के हमले ने गुड़ का गोबर कर दिया और उनकी पोल खुल गई।

चीन ने हमले के बाद दिया गोल-मोल बयान

दरअसल, हमास के हमले के बाद चीन की तरफ से जो बयान आया उसमें न तो आतंकी संगठन की हरकत का जिक्र था, और न ही शांति स्थापित करवाने की किसी कोशिश का। चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में एक स्वतंत्र फिलीस्तीन की मांग उठाई थी और इजरायल के नागरिकों पर हुए हमले की बात को गोल कर दिया था। उसने अपने बयान में सिर्फ इतना कहा था कि इस जंग में शामिल दोनों पक्षों को धैर्य दिखाना चाहिए। बाद में मंत्रालय ने एक दूसरे बयान में कहा कि दोनों ही पक्ष चीन के 'दोस्त' हैं और घटना में हताहतों को लेकर उसे 'दुख' है।

इजरायल को नहीं पसंद आई चीन की बात
चीन का यह बयान इजरायल को कतई पसंद नहीं आया और उसने कहा कि बीजिंग की तरफ से ऐसी बातें सुनकर निराशा हुई है। दूसरी तरफ अमेरिका ने भी इजरायल के प्रति किसी तरह की सहानुभूति न दिखाने के लिए चीन की आलोचना की। हालांकि इस सबके बीच सवाल यह उठता है कि जो जिनपिंग कुछ महीने पहले तक शांति के मसीहा बनने की कोशिश कर रहे थे, इतनी बड़े संकट के दौरान अपनी तरफ से कुछ कह क्यों नहीं रहे। आखिर वह इस स्थिति से बाहर निकलने के किसी रास्ते के बारे में बात तक क्यों नहीं कर रहे?

मध्य पूर्व के देशों पर है चीन की नजर
चीन के हालिया कदमों से साफ है कि उसकी नजर इन दिनों मध्य-पूर्व के देशों पर है। हमास के पीछे ईरान का हाथ है और वह इसीलिए आतंकी संगठन का नाम खुलकर नहीं ले रहा। उसकी कोशिश है कि दोनों ही पक्षों से बनाकर रखा जाए और आगे चलकर हालात के मुताबिक फैसला लिया जाए। दूसरी तरफ चीन जिस तरह से ईरान और अन्य अरब देशों को अपने प्रभाव में ले सकता है, वैसे इजरायल को नहीं। इसलिए वह दूसरे अरब देशों की कीमत पर इजरायल के साथ खड़ा नहीं दिखना चाहता। हालांकि कुछ भी हो, हमास और इजरायल की जंग ने चीन की पोल तो खोल ही दी है।

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