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इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के आरोपों पर भड़के फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, कहा-भ्रामक है बयान

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Aug 20, 2025 09:16 pm IST,  Updated : Aug 20, 2025 09:16 pm IST

फिलिस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता देने के मैक्रों के संकेत के बाद फ्रांस और इजरायल में ठन गई है। दोनों देश एक दूसरे पर आक्रामक हो रहे हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (बाएं) और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (दाएं)- India TV Hindi
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (बाएं) और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (दाएं) Image Source : AP

पेरिसः फिलस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के मुद्दे पर फ्रांस और इज़रायल के बीच कूटनीतिक तनाव और गहराता जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हालिया टिप्पणी की तीखी आलोचना करते हुए उसे "घृणित", "भ्रामक" और "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया है।

नेतन्याहू ने लगाया था ये आरोप

विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक पत्र में आरोप लगाया कि फ्रांस द्वारा फिलस्तीनी राष्ट्र को मान्यता देने की घोषणा के बाद से फ्रांस में यहूदी-विरोधी घटनाओं में तेजी आई है। यह पत्र नेतन्याहू ने सोमवार को राष्ट्रपति मैक्रों को भेजा था, जिसकी पुष्टि 'एसोसिएटेड प्रेस' ने की है। पत्र में नेतन्याहू ने लिखा, "फिलस्तीन के लिए आपका समर्थन इस यहूदी-विरोधी भावना को और भड़का रहा है।"

मैक्रों कार्यालय ने दिया ये जवाब

जवाब में फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने मंगलवार शाम एक कड़ा बयान जारी किया। इसमें कहा गया, "फ्रांस द्वारा सितंबर में फिलस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के निर्णय को लेकर पेरिस में यहूदी-विरोधी हिंसा में वृद्धि के लिए जिम्मेदार होने का विश्लेषण, भ्रामक, घृणित और पूरी तरह अस्वीकार्य है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। वर्तमान समय में गंभीरता और जिम्मेदारी की आवश्यकता है, न कि सामान्यीकरण और मनमाने आरोपों की।"

मैक्रों ने दिया था फिलिस्तीन को मान्यता का संकेत

गौरतलब है कि पिछले महीने राष्ट्रपति मैक्रों ने संकेत दिए थे कि फ्रांस सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान फिलस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे सकता है। इस घोषणा के बाद से ही इज़रायल और उसके पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव देखा गया है। हालांकि, फ्रांस के इस रुख को कई देशों का समर्थन मिला है। ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने मैक्रों की पहल का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने नेतन्याहू के उस आरोप को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने फिलस्तीन को मान्यता देने को "इज़रायल के साथ विश्वासघात" कहा था और ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व को "कमज़ोर" बताया था।

फ्रांस में रहते हैं कितने यहूदी

फ्रांस में यहूदी समुदाय की बात करें तो यह देश पश्चिमी यूरोप की सबसे बड़ी यहूदी आबादी वाला देश है, जहां अनुमानतः 5,00,000 यहूदी रहते हैं। यह कुल फ्रांसीसी जनसंख्या का लगभग 1% है। फिलस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का मुद्दा अब केवल इज़रा.ल और अरब देशों के बीच का मसला नहीं रहा, बल्कि यह पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों के आपसी संबंधों को भी प्रभावित कर रहा है। फ्रांस द्वारा अपनी स्थिति को स्पष्ट और मजबूत तरीके से पेश करना यह दर्शाता है कि यूरोपीय देशों में भी फिलस्तीन के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आ रहा है। दूसरी ओर, इज़रायल इसे अपने खिलाफ यहूदी-विरोधी भावना के उभार के रूप में देखता है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बनता जा रहा है।

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