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इज़रायल की सुरक्षा के लिए दो राष्ट्र नीति पर अमल ज़रूरी : ओबामा

 Written By: IANS
 Published : May 16, 2015 06:42 am IST,  Updated : May 16, 2015 06:43 am IST

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का मानना है कि इजरायल और फिलिस्तीन के विवाद के हल की कुंजी दो अलग-अलग राष्ट्रों के वजूद में आने में छिपी हुई है। उनका मानना है कि यही

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इज़रायल की सुरक्षा के लिए दो राष्ट्र नीति पर अमल ज़रूरी : ओबामा

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का मानना है कि इजरायल और फिलिस्तीन के विवाद के हल की कुंजी दो अलग-अलग राष्ट्रों के वजूद में आने में छिपी हुई है। उनका मानना है कि यही वह समाधान है जो इजरायल की मुकम्मल सुरक्षा की गांरटी देता है। समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक बराक ओबामा ने कहा कि उनका मानना है कि दो स्वतंत्र राष्ट्रों को अस्तित्व में लाकर मध्य पूर्व के इस मसले का समाधान किया जा सकता है। यही वह रास्ता है जो न सिर्फ इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति के लिए बेहद जरूरी है बल्कि यही इजरायल को एक लोकतांत्रिक और यहूदी राष्ट्र के रूप में हमेशा-हमेशा के लिए सुरक्षित बनाने में निर्णायक रूप से कारगर साबित होगा।

ओबामा ने यह बातें गुरुवार को कैंप डेविड स्थित राष्ट्रपति आरामगाह में फारस की खाड़ी के छह देशों के प्रमुखों से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहीं।

ओबामा ने हालांकि इसी हफ्ते वैटिकन और फिलिस्तीन के बीच हुए उस करार पर कुछ भी कहने से मना कर दिया जो फिलिस्तीन और इजरायल नाम के दो अलग-अलग देशों का समर्थन करता है और साथ ही वैटिकन की तरफ से आज़ाद फिलिस्तीन को मान्यता देता है।

ओबामा ने कहा कि अभी इसकी संभावना ( इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति समझौता) दूर की कौड़ी लग रही है लेकिन उनका मानना है कि इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि क्या सही है और क्या संभव है।

ओबामा ने इस बात को माना कि हाल ही में अस्तित्व में आई इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कुछ सदस्य दो राष्ट्र के समाधान की नीति का समर्थन नहीं करते। लेकिन साथ ही दोहराया कि वह इसी रुख का समर्थन करते रहेंगे।

अमेरिका और इजरायल के संबंधों में हाल के दिनों में थोड़ी तल्खी आई है।

मार्च में ओबामा ने ऐलान किया था कि वो एक संप्रभु फिलिस्तीन राष्ट्र से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का समर्थन करने पर विचार कर रहे हैं। ध्यान रहे कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र में दशकों से इस तरह के किसी भी प्रस्ताव को वीटो करता रहा है।

अपने पहले की अवस्थिति में बदलाव के बारे में सोचने का अमेरिका का फैसला उस वक्त सामने आया जब नेतन्याहू ने कहा था कि जब तक उनके हाथ में इजरायली सरकार की कमान है, तब तक फिलिस्तीन राष्ट्र वजूद में नहीं आएगा। नेतन्याहू दो दिन बाद ही अपने इस बयान से पलट गए थे।

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