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अमेरिकन कोर्ट ने राणा के प्रत्यर्पण पर फिलहाल लगाई रोक, बाइडेन प्रशासन की अपील खारिज

 Edited By: Deepak Vyas
 Published : Aug 22, 2023 01:57 pm IST,  Updated : Aug 22, 2023 04:56 pm IST

सेंट्रल कैलिफोर्निया में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जिला न्यायाधीश डेल एस.फिशर ने अपने हालिया आदेश में कहा कि राणा के प्रत्यर्पण पर रोक लगाने के अनुरोध वाले उसके ‘एक पक्षीय आवेदन’ को मंजूरी दी जाती है।

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अमेरिकन कोर्ट ने राणा के प्रत्यर्पण पर फिलहाल लगाई रोक, बाइडेन प्रशासन की अपील खारिज Image Source : FILE

America News: अमेरिका की कोर्ट ने देश के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन की अपील खारिज करते हुए पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश दिया है। राणा मुंबई में 2008 में हुए आतंकवादी हमले में शामिल होने के मामले में भारत में मुकदमे का सामना कर रहा है। राणा (62) ने कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ ‘नाइंथ सर्किट कोर्ट’ में अपील की है, जिसमें बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका को खारिज कर दिया गया था। 

सेंट्रल कैलिफोर्निया में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जिला न्यायाधीश डेल एस.फिशर ने अपने हालिया आदेश में कहा कि राणा के प्रत्यर्पण पर रोक लगाने के अनुरोध वाले उसके ‘एक पक्षीय आवेदन’ को मंजूरी दी जाती है। न्यायाधीश फिशर ने 18 अगस्त को जारी आदेश में कहा, ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द नाइन्थ सर्किट’ के समक्ष लंबित राणा की याचिका पर फैसला आने तक उसके भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाई जाती है।’ इस तरह न्यायाधीश ने सरकार की इन सिफारिशों को खारिज कर दिया कि राणा के प्रत्यर्पण पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए। 

26/11 के मुंबई हमलों का गुनहगार है राणा

राणा मुंबई हमलों में अपनी भूमिका को लेकर आरोपों का सामना कर रहा है और माना जाता है कि 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से उसके संपर्क थे। न्यायाधीश ने कहा, ‘प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 6 (1) में ‘अपराध’ का उचित अर्थ स्पष्ट नहीं है और विभिन्न न्यायविद अलग-अलग निष्कर्ष निकाल सकते हैं। राणा की स्थिति निश्चित रूप से विचारणीय है और अपील पर सुनवाई में इसे सही पाया जा सकता है।’ न्यायाधीश ने लिखा, ‘भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध का अनुपालन मूल्यवान है, लेकिन राणा के प्रत्यर्पण की कार्यवाही तीन साल से अधिक समय से जारी है, जिससे पता चलता है कि इस प्रक्रिया में अब तक कोई जल्दबाजी नहीं की गई है।’

10 अक्टूबर से पहले दलीलें पेश करने को कहा

‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द नाइन्थ सर्किट’ ने राणा से 10 अक्टूबर से पहले अपनी दलीलें पेश करने को कहा है और अमेरिका सरकार को आठ नवंबर तक दलीलें रखने को कहा है। न्यायाधीश फिशर ने लिखा कि राणा की दलील है कि अगर उसके प्रत्यर्पण पर रोक नहीं लगाई गई तो उसे गंभीर क्षति पहुंच सकती है। इससे पहले अमेरिकी वकील जॉन जे.लुलेजियान ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के समक्ष अपील की कि प्रत्यर्पण के लिए लंबित याचिका पर रोक को लेकर राणा के एक पक्षीय आवेदन को मंजूर नहीं किया जाए। 

उन्होंने दलील दी कि प्रत्यर्पण पर रोक से भारत के प्रति अमेरिका के दायित्व को पूरा करने में ‘अकारण देरी’ होगी और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी साख को क्षति पहुंचेगी तथा अमेरिका के भगोड़ों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए अन्य देशों का सहयोग प्राप्त करने की इसकी क्षमता धूमिल होगी। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा मुंबई में किए गए 26/11 आतंकवादी हमला मामले में भारत का राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) राणा की भूमिका की जांच कर रहा है। मुंबई में 2008 में हुए इस आतंकवादी हमलों में छह अमेरिकियों सहित कुल 166 लोग मारे गए थे।

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