क्लीवलैंड: अमेरिका में मंगलवार की सुबह करीब 9 बजे एक उल्कापिंड में हुए धमाके से लोग बुरी तरह डर गए और तरह-तरह के कयास लगाने लगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्लीवलैंड के आसमान में एक बड़ा उल्कापिंड तेजी से गुजरा। बताया जा रहा है कि करीब 7 टन वजनी यह उल्कापिंड करीब 73000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आया और जोरदार धमाके के साथ ऊपरी वायुमंडल में ही टूट गया। ईरान के साथ जारी अमेरिका की जंग के समय में हुए इस धमाके से लोग डर गए और कईयों को लगा कि कोई विस्फोट हो गया है।
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दिन के उजाले में भी कई राज्यों में दिखाई दिया उल्कापिंड
उल्कापिंड में हुए विस्फोट से इतनी रोशनी पैदा हुई कि दिन के उजाले में भी यह कई राज्यों से दिखाई दिया। अमेरिकन मेटियोर सोसाइटी को विस्कॉन्सिन से लेकर मैरीलैंड तक के लोगों से रिपोर्ट्स मिलीं। नासा ने बाद में पुष्टि की कि यह एक छोटा क्षुद्रग्रह यानी कि एस्टरॉइड था, जिसका व्यास लगभग 6 फीट था। NASA के मेटियॉइड एनवायरनमेंट्स ऑफिस के प्रमुख बिल कुक ने बताया कि यह उल्कापिंड लेक एरी के पास लॉरेन के ऊपर करीब 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहली बार दिखा था। यह दक्षिण-पूर्व दिशा में 55 किलोमीटर की दूरी तय करके वैली सिटी के ऊपर विस्फोट के साथ टूट गया।
धमाका इतना तेज था कि लोग बुरी तरह डर गए
टूटने पर इसने 250 टन टीएनटी जितनी ऊर्जा छोड़ी, जिससे जोरदार धमाका और कंपन हुआ। बता दें कि ऐसा धमाका अगर जमीन पर होता तो एक बड़े हिस्से में तबाही मचा सकता था। यही वजह है कि लोग बुरी तरह डर गए। नेशनल वेदर सर्विस क्लीवलैंड के स्टाफ ने भी यह धमाका सुना और कंपन महसूस किया। NWS के मौसम वैज्ञानिक ब्रायन मिशेल ने कहा, 'कुछ छोटे टुकड़े मिल सकते हैं, लेकिन ज्यादातर हिस्सा वायुमंडल में जलकर खाक हो गया होगा।' वैज्ञानिकों ने बताया कि अमेरिका में हर दिन औसतन एक उल्कापिंड गिरता है। अभी तक किसी तरह के नुकसान या बड़े मलबे की खबर नहीं है।