Tuesday, February 10, 2026
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जयशंकर के तीखे बयान की USA के TV चैनलों पर चर्चा, ट्रंप के वित्त मंत्री बोले-"भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र, अंत में हम हो लेंगे साथ"

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Aug 27, 2025 06:43 pm IST, Updated : Aug 27, 2025 07:35 pm IST

अमेरिका से छिड़े टैरिफ वार के बीच भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के एक तीखे बयान ने अमेरिका में तहलका मचा दिया है। इसकी चर्चा अमेरिका के टेलीविजन चैनलों पर खूब हो रही है। जयशंकर के इस बयान के बाद अमेरिका का रुख नरम पड़ता दिख रहा है।

डॉ. एस जयशंकर भारत के विदेश मंत्री (बाएं) और अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (दाएं)- India TV Hindi
Image Source : AP डॉ. एस जयशंकर भारत के विदेश मंत्री (बाएं) और अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (दाएं)

वाशिंगटनः भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बुधवार से 50 फीसदी टैरिफ लागू कर दिए जाने से दोनों देशों के रिश्तों में काफी ज्यादा तल्खी आ गई है। इस बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के एक बयान ने अमेरिका में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिका के टेलीविजन चैनलों पर जयशंकर के इस बयान की खूब चर्चा हो रही है। जयशंकर के इस बयान के बाद अमेरिका के रुख में भी नरमी देखी जा रही है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को जयशंकर के तीखे बयान के बाद यहां तक कहना पड़ा कि भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र है। अंततः हम भारत के साथ आ ही जाएंगे।

जयशंकर के बयान की अमेरिका में चर्चा

जयशंकर ने क्या बयान दिया है, आइये आपको बताते हैं। दरअसल रूस से भारत के तेल खरीदे जाने के आरोपों पर जयशंकर ने कहा कि अगर अमेरिका को भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से समस्या है तो वह भारत से शोधित तेल खरीदना बंद कर दे। जयशंकर के इस तल्ख बयान से अमेरिका के होश उड़ गए हैं। अमेरिका के फॉक्स टीवी चैनल पर एक एंकर ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से ऐसा ही सवाल पूछा। एंकर ने कहा,  "भारत के विदेश मंत्री ने कहा है कि अगर अमेरिका को भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से समस्या है, तो वह भारत से रिफाइंड (परिष्कृत) तेल खरीदना बंद कर सकता है...इस पर आपका क्या कहना है?" एंकर के इस सवाल पर अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा, "खैर, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। अंततः हम एक साथ आ ही जाएंगे।" अमेरिका के इस बयान से साफ है कि वह भारत से दुश्मनी मोल लेने का नुकसान अच्छी तरह से समझ रहा है।

अमेरिका ने क्यों लगाया भारत पर शुल्क

अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसे शोधित करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है। ट्रंप का आरोप है कि इससे रूस को आर्थिक ताकत मिल रही है और यूक्रेन युद्ध रोकने में यह प्रयास बाधा बन रहा है। ट्रंप भले ही यह दावा कर रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि अमेरिका भारत की ओर से उस पर लगाए गए शुल्क में जिस तरह की और जिन क्षेत्रों में व जिन-जिन उत्पादों पर रियायत चाहता था, भारत सरकार ने उन शर्तों को नहीं माना। इससे अमेरिका बौखला गया। लिहाजा ट्रंप ने भारत पर पहले 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था, जो 7 अगस्त से लागू हो गया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने उसी दिन रूस से कच्चे तेल खरीदने के लिए भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत करने की घोषणा की थी, जो अब 27 अगस्त से लागू कर दिया गया। 

क्योंकि ट्रंप ने इस पर समझौते पर बातचीत के लिए 21 दिन का समय दिया था। मगर कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी शर्तों पर कोई भी समझौता करने से मना कर दिया। पीएम मोदी ने अभी सोमवार को जोर देकर कहा था कि वह किसानों, पशुपालकों और लघु उद्योगों के हितों से समझौता नहीं कर सकते। उन्होंने आगाह किया कि ‘‘ हम पर दबाव बढ़ सकता है लेकिन हम डटे रहेंगे।’ भारत के इस रुख के बाद अमेरिका और उसके राष्ट्रपति ट्रंप का दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। क्योंकि भारत ने अमेरिका के विकल्प में दूसरा बाजार ढूंढ़ना शुरू कर दिया है। लिहाजा ट्रंप अपने ही देश में आलोचनाओं से घिरने लगे हैं। 

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