शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में उन्हें न्यायाधीश कहा जाता है। कर्णफल दाता शनि सभी को कर्मों के हिसाब से फल देते है। लेकिन अगर वो प्रसन्न हो जाएं तो हर किसी के झोली भी भर सकते हैं। इसीलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए विभिन्न तरह के उपाय अपनाते हैं, जिसमें से एक उपाय सरसों का तेल चढ़ाना भी है।
शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि भगवान शनि को सरसों का तेल चढ़ाने से वह प्रसन्न होते हैं, जिससे आपको साढ़े साती, शनिदोष या फिर ढैया से छुटकारा मिल जाता है। भगवान शनि को सिर्फ सरसों का तेल चढ़ाया ही नहीं जाता है बल्कि सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। जानिए आखिर शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाने के पीछे क्या है पौराणिक कथा?
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भगवान हनुमान के कारण शुरू हुई ये प्रथा
रामायण की कथा के अनुसार माना जाता है कि एक बार लंकापति रावण ने शनिदेव को कैद कर लिया था। ऐसे में जब हनुमान जी माता सीता के खोज में लंका आए थे, तो उन्होंने शनिदेव को कैद में देखा। ऐसे में शनिदेव ने हनुमान जी से मुक्त करना का आग्रह किया। तब हनुमान जी ने शनिदेव को कैद से मुक्त करके लंका से बहुत दूर फेंक दिया था, जिससे वह सुरक्षित स्थान में पहुंच जाएं।
हनुमान जी द्वारा शनिदेव को इस तरह फेंकने से काफी चोट लग गई। ऐसे में हनुमान जी ने शनिदेव की पीड़ा कम करने के लिए सरसों के तेल को घाव में लगाया। इससे शनिदेव को काफी आराम मिला और वह काफी खुश हुए। ऐसे में शनिदेव ने कहा कि आने वाले समय में जो भक्त मुझे सरसों का तेल अर्पित करेगा उसके ऊपर हमेशा मेरी कृपा बनी रहेगी।
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भगवान शनि को सरसों का तेल चढ़ाने से कई तरह के दोषों से छुटकारा मिलता है। शनिदेव की कृपा से आपको सुख-समृद्धि, धन-दौलत के साथ हर काम में सफलता का वरदान मिलता है।
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