बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कुटुंबा सीट की लड़ाई बेहद अहम रहने वाली है। यहां लगातार दो बार से कांग्रेस पार्टी को जीत मिल रही है। हालांकि, यहां का वोटिंग पैटर्न इस तरफ इशारा करता है कि कांग्रेस के राजेश कुमार लोगों की पहली पसंद कम और एकमात्र विकल्प ज्यादा हैं। इस वजह से इस बार यहां से विधायक का चेहरा बदल सकता है।
2020 विधानसभा चुनाव में यहां 48 फीसदी मतदाताओं ने मतदान ही नहीं किया था। मतदान करने वाले 2586 लोगों ने नोटा का विकल्प चुना था। इसी वजह से इस बार बदलाव की प्रबल संभावना नजर आती है।
कुटुंबा में महागठबंधन ने मौजूदा विधायक राजेश कुमार को कांग्रेस के सिंबल पर टिकट दिया है। वहीं, एनडीए गठबंधन में हम के ललन राम प्रत्याशी बने हैं। जनसुराज के उम्मीदवार श्याम बली सिंह हैं। ललन राम ने 2020 में भी यहां से चुनाव लड़ा था। उस समय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उन्होंने 20433 वोट हासिल किए थे, जबकि हम उम्मीदवार को 34169 वोट और कांग्रेस के राजेश कुमार ने 50822 वोट हासिल कर चुनाव जीता था। इस बार हम ने ललन राम को टिकट दिया है, जिससे उनका दावा मजबूत होता है। वहीं, जनसुराज ने तीसरा विकल्प भी दिया है। छठ के बाद मतदान होने से वोट प्रतिशत बढ़ने के आसार हैं। ऐसे में कुटुंबा को इस बार नया विधायक मिल सकता है।
2010 विधानसभा चुनाव में ललन राम को जेडीयू से टिकट मिला था और उन्होंने जीत हासिल की थी। हालांकि, इसके बाद उनका पत्ता कट गया और वह सत्ता से दूर रहे हैं। 2020 में उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरकर अपना दम दिखाया था। इस बार उन्हें एनडीए गठबंधन से टिकट मिला है। ऐसे में उनके जीत हासिल करने की संभावना भी बढ़ गई है। हालांकि, यहां की जनता नए विकल्प की तरफ जाकर जन सुराज को भी चुन सकती है, लेकिन कांग्रेस के लिए अपना गढ़ बचा पाना मुश्किल होगा।
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