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बिहार में 25 अगस्त से ट्रांसपोर्टर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल, फेडरेशन ने सरकार के सामने रखी ये मांगे

 Published : Aug 22, 2025 02:59 pm IST,  Updated : Aug 22, 2025 03:05 pm IST

बिहार में 25 अगस्त से बिहार के ट्रांसपोर्टर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन ने बताया कि मांगों के लिए पदाधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया कि जल्द से जल्द सभी बिन्दुओं पर विचार विमर्श करते हुए समस्याओं का निराकरण किया जाएगा।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : PTI

मुजफ्फरपुर: बिहार के ट्रांसपोर्टर 25 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से पहले अपनी मांगों को लेकर सरकार से ट्रांसपोर्टरों की 24 अगस्त को वार्ता होगी। बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के एक पदाधिकारी ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगे मान लेती है तो हड़ताल वापस ले ली जाएगी। अगर वार्ता सफल नहीं होती है तो 25 अगस्त से हम लोग हड़ताल पर जाएंगे।  

बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के पदाधिकारियों ने दी ये जानकारी

मुजफ्फरपुर में बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह ने मीडिया को बताया कि ट्रांसपोर्टरों की समस्या को लेकर सरकार और अधिकारियों से बात हुई है। उदयशंकर सिंह ने बताया कि सरकार और सरकार के अधिकारियों से बात हुई है और समस्या दूर करने का सिर्फ आश्वासन मिला है लेकिन ट्रांसपोर्टरों की समस्या दूर करने में सरकार और सरकार के अधिकारी अभी तक सफल नहीं हुए हैं।

 मुकेश शर्मा ने कही ये बातें

बिहार मोटर ट्रान्सपोर्ट फेडरेशन के जिलाध्यक्ष मुकेश शर्मा ने भी बताया कि 19 अगस्त को पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) एवं राज्य परिवहन आयुक्त से मिलकर परिवहन व्यवसाय में हो रही समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। 

बिहार मोटर फेडरेशन की प्रमुख मांग

  1. वाहन चालकों को अनावश्यक तरीके से पुलिस द्वारा परेशान किए जाने से मुक्ति दिलाना
  2. सभी गाड़ियों (बस, ट्रक, थ्री व्हीलर, चार पहिया वाहन, एवं मोटरसाइकिल) पर पुलिस द्वारा अनावश्यक फोटो खींच कर जुर्माना कर मोबाइल पर मैसेज भेजना, जिसे समाप्त किया जाय।
  3. आर.टी.ए. में परमिट ससमय नवीकरण में आवेदन देने पर लगभग छः माह लगता है एवं उस पर फाइन लिया जाता है उसे समाप्त किया जाय।
  4. परमिट प्रत्यर्पण करने में वाहन स्वामी को परेशान करने के नियत से छः महीना से एक साल तक लगता है उसे समाप्त किया जाय।
  5. परमिट स्वीकृति के बाद कार्यालय द्वारा निर्गत करने में दो माह से चार माह तक समय लिया जाता है जबकि एक सप्ताह में डाक द्वारा भेजने का नियम है उसे समाप्त किया जाय।
  6. बहुत ऐसी गाड़ी जिसका रोड में परिचालन नहीं करने पर भी जुर्माना का मैसेज आ गया है उसे समाप्त किया जाय।
  7. स्कूल बस में निजी वाहन स्वामी को सम्पूर्ण बिहार स्कूल परमिट निर्गत करने की व्यवस्था की जाय ताकि निजी वाहन स्वामी भी गाड़ी खरीद कर व्यवसाय करें।
  8. अन्तर्राजीय मार्गो यूपी, बंगाल, उड़िसा, छत्तीसगढ़ के लिए निजी बसों की भागीदारी सुनिश्चित किया जाय। 
  9. व्यावसायिक वाहन पर जुर्माना पहले भी होता था जिसके लिए मजिस्ट्रेट द्वारा कोर्ट में निष्पादन हो रहा था परन्तु अभी जुर्माना होने पर न्यायालय में अपील हेतु कोर्ट की व्यवस्था नहीं रहने से वाहन स्वामी को परेशानी के साथ अधिक रुपया लगता है।

रिपोर्ट- संजीव कुमार, मुजफ्फरपुर 

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