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सीएम विष्णु देव साय ने 'नक्सल मुक्त' घोषित छत्तीसगढ़ के लिए पेश किया खाका, कहा- राज्य की प्रगित में बन रहा था बाधा

 Published : Apr 12, 2026 02:57 pm IST,  Updated : Apr 12, 2026 03:01 pm IST

सीएम विष्णु देव साय ने कहा कि बंदूकें शांत होने के साथ, राज्य अब पूर्व में दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा में एकीकृत करने के लिए एक व्यापक 'नियाद नेल्लानार' (आपका अच्छा गांव) नीति की ओर बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय- India TV Hindi
छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय Image Source : PTI

छत्तीसगढ़ को 'नक्सल-मुक्त' घोषित किए जाने के दो सप्ताह बाद राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आंतरिक सुरक्षा अभियानों से हटकर बड़े पैमाने पर ग्रामीण विकास और आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की ओर निर्णायक बदलाव का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री साय की महत्वाकांक्षी योजनाओं में क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के अलावा, कभी नक्सली हिंसा के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना भी शामिल है। 

जब वह 10 साल के थे, तब उनके पिता का निधन

हाल ही में नई दिल्ली में पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने दशकों पुराने नक्सलवाद के सफल उन्मूलन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली 'डबल इंजन सरकार' और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित रणनीतिक समयसीमा को दिया। साय जब 10 साल के थे तब उनके पिता का निधन हो गया था। साय ने अपने पिता के निधन के बाद परिवार के भरण-पोषण के लिए अपने प्रारंभिक वर्षों में बगिया गांव में खेतों में काम किया। वह अब इस बात से राहत महसूस करते हैं कि छत्तीसगढ़ आखिरकार नक्सलवाद से मुक्त हो गया है, जो राज्य की प्रगति में बाधा बन रहा था। 

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में लिया गया दृढ़ संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा, 'एक समय ऐसा था जब इसको लेकर अनिश्चितता थी कि नक्सलवाद की समस्या का कभी समाधान हो पाएगा या नहीं। लेकिन आज, 'डबल इंजन सरकार' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प के साथ-साथ हमारे सुरक्षा बलों के साहस के बल पर, हम नक्सल मुक्त राज्य की ओर अग्रसर हुए हैं।' 

लोग दशकों तक विकास से वंचित रहे

सीएम साय को इस बात का खेद है कि इस क्षेत्र के लोग दशकों तक विकास से वंचित रहे। उन्होंने कहा, 'लेकिन अब विकास उन तक पहुंच रहा है और उनका जीवन बेहतर होगा।' नक्सल समस्या के फिर से उभरने की आशंकाओं पर मुख्यमंत्री राज्य के परिवर्तन को लेकर आत्मविश्वासी हैं, लेकिन साथ ही सतर्क भी हैं। 

स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि पर दिया ध्यान

उन्होंने कहा कि सुरक्षा शिविरों की स्थायी मौजूदगी के साथ-साथ अस्पताल और विद्यालयों के आने से एक 'विकास का ढांचा' तैयार हुआ है। कम उम्र में ही परिवार की देखभाल करने के बाद, साय अब उसी कर्तव्यनिष्ठा को एक ऐसे राज्य में लागू करते हैं जो दशकों के संघर्ष से उभर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया है। 

वह बस्तर क्षेत्र के 'संघर्षक्षेत्र' के तौर पर पहचान को बदलने का प्रयास कर रहे हैं और उनका कहना है कि राज्य सरकार ने एक व्यापक 'बस्तर 2.0' योजना पेश की है, जो खनिज-समृद्ध इस क्षेत्र को पर्यटन, उच्च-तकनीकी बुनियादी ढांचे और कृषि विकास की ओर उन्मुख करेगी। 

 500 से गांवों तक पहुंची सिंचाई योजना

मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र में हुए परिवर्तन को रेखांकित किया, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 500 से अधिक ऐसे गांवों तक सफलतापूर्वक सरकारी योजनाएं पहुंचाई हैं जो पहले दुर्गम थे। 'नियाद नेल्लानार' पहल के तहत सरकार मोबाइल टावर लगा रही है, सड़कें बना रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि हर परिवार को बिजली और स्वच्छ पानी उपलब्ध हो। बुनियादी ढांचे के अलावा, राज्य ने कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इंद्रावती नदी पर देवगाव और मथना सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। 

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