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नक्सल हिंसा थमने के बाद अपने घर लौट रहे लोग, बस्तर में धीरे-धीरे दिखने लगी है रौनक

 Published : Jul 10, 2026 10:11 am IST,  Updated : Jul 10, 2026 10:11 am IST

बस्तर में नक्सल हिंसा कम होने के बाद विस्थापित परिवार अपने पैतृक गांवों में लौटने लगे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार सड़क, आवास, पेयजल, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास कर रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और आवास योजना के जरिए सुरक्षित पुनर्वास व स्थायी बसाहट पर जोर दिया जा रहा है।

Bastar Naxal violence, Chhattisgarh rehabilitation, Bastar displaced families- India TV Hindi
नक्सल हिंसा के चलते बस्तर से बड़ी संख्या में पलायन हुआ था। Image Source : ANI

Highlights

  • नक्सल हिंसा थमने के बाद बस्तर के विस्थापित परिवार अपने पैतृक गांवों में लौटने लगे हैं।
  • लौट रहे परिवारों के लिए सरकार सड़क, आवास, स्कूल और पेयजल जैसी सुविधाएं तेजी से विकसित कर रही है।
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बस्तर में 500 किमी से ज्यादा सड़क निर्माण की तैयारी चल रही है।

जगदलपुर: कभी नक्सल हिंसा के कारण अपना घर-गांव छोड़ने को मजबूर हुए बस्तर के कई परिवार अब दोबारा अपने पैतृक गांवों की ओर लौट रहे हैं। क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार इन परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए गांवों में सड़क, आवास, पेयजल, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटी है। बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने बताया कि पहले नक्सल हिंसा और डर के कारण कई परिवार दूसरे इलाकों में चले गए थे।

सैकड़ों किमी सड़क निर्माण को मंजूरी

अब जब पूरा बस्तर क्षेत्र धीरे-धीरे नक्सल मुक्त हो रहा है और लोग वापस लौट रहे हैं, तो सरकार उनकी बसाहट के लिए जरूरी सुविधाएं तेजी से विकसित कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चौथे चरण (बैच-1) में 236 किलोमीटर सड़क बनाने की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बैच-2 में 292 किलोमीटर सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि लौटने वाले परिवारों को बेहतर सड़क और अन्य जरूरी सुविधाएं मिलें, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन शुरू कर सकें।

लौटने लगे अपना गांव छोड़ चुके परिवार

कोलेंग-छिंगगुर गांव के निवासी फुलदेव ठाकुर ने बताया कि नक्सल हिंसा के दौर में गांव के कई परिवार मजबूरी में पलायन कर गए थे, लेकिन अब हालात बदलने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पहले गांव में 107 परिवार रहते थे। इनमें से 60 से 70 परिवार नक्सल हिंसा के कारण गांव छोड़कर चले गए थे। अब इनमें से 30 से अधिक परिवार वापस लौट चुके हैं और अपने पुराने घरों में फिर से जीवन बसाने की कोशिश कर रहे हैं। फुलदेव ठाकुर ने बताया कि दूसरी जगह उनके पास न जमीन थी और न ही स्थायी ठिकाना, इसलिए अब हालात सामान्य होने पर वे अपने पैतृक गांवों में लौट रहे हैं।

सुविधाओं को विकसित कर रही सरकार

इस सप्ताह की शुरुआत में छत्तीसगढ़ सरकार ने भी कहा था कि नक्सलवाद पर नियंत्रण के बाद बालेबेड़ा और गरपा जैसे गांवों में विस्थापित परिवारों की वापसी का रास्ता खुला है। सरकार इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही गांवों में स्कूल, पेयजल व्यवस्था, सड़क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को भी दोबारा विकसित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ विकास कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि लौटने वाले परिवार अपने गांवों में स्थायी रूप से बस सकें।

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