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'दिल्ली बन गई है बाल तस्करी की मंडी, बस दो घंटे घूमिए', हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पुलिस से मांगा जवाब

 Published : Apr 01, 2026 09:29 pm IST,  Updated : Apr 01, 2026 09:35 pm IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने बाल तस्करी को लेकर सख्त टिप्पणी की है। साथ ही कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : PTI

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी बाल तस्करी की 'मंडी' बन गई है। कोर्ट ने रेलवे और पुलिस को उस जनहित याचिका पर जवाब देने को कहा, जिसमें रेलवे स्टेशनों और आसपास के क्षेत्रों में बाल तस्करी की घटनाओं पर चिंता जताई गई है। 

कोर्ट ने जारी किया नोटिस

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस' द्वारा दायर जनहित याचिका पर रेलवे, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को नोटिस जारी किया। पीठ ने पाया कि न्यायिक आदेशों के बाद भी बाल तस्करी का खतरा बना हुआ है। उसने एनसीपीसीआर को इस मामले में उचित निर्देश पारित करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा। 

याचिका पढ़ने की जरूरत नहीं

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई के लिए तय करते हुए एनसीपीसीआर से अपने सुझाव देने को भी कहा। सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की, 'दिल्ली अब बाल तस्करी की मंडी बन गई है और इस तथ्य को जानने के लिए आपको याचिका पढ़ने की जरूरत नहीं है। बस दो घंटे (रेलवे स्टेशनों के आसपास) घूमिए।' 

6 सालों में 84,000 से अधिक बच्चों को बचाया गया

कोर्ट ने गौर किया कि हालांकि रेलवे सहित अन्य विभागों द्वारा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए उपाय अपनाए गए, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन की कमी के कारण स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रभसहाय कौर ने कहा कि 2018 से 2024 के बीच रेलवे परिसर में रेलवे सुरक्षा बल द्वारा 84,000 से अधिक बच्चों को बचाया गया। 

जब तस्करों को सौंपी गई बच्ची

उन्होंने यह भी बताया कि एक घटना ऐसी भी हुई थी जिसमें आनंद विहार रेलवे स्टेशन से बचाई गई एक बच्ची को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने के बजाय तस्करों को वापस सौंप दिया गया था, और बाद में एक छापेमारी में उसे फिर से बचाया गया। 

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