नई दिल्ली: दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट अब सोमवार से सुनवाई करेगा। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को मिली राहत को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि इस मामले पर सोमवार से सुनवाई होगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे तब तक अपने-अपने जवाब दाखिल कर दें।
सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की उस चिट्ठी पर कोई टिप्पणी नहीं की, जिसमें उन्होंने कार्यवाही का बहिष्कार करने की बात कही थी। हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़े ट्रायल कोर्ट के सभी रिकॉर्ड और पुराने आदेश भी तलब किए हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने उस अर्जी पर भी CBI से जवाब मांगा है, जिसमें पहले लगाए गए स्टे को हटाने की मांग की गई है। इसके बाद इस मामले पर सुनवाई टल गई। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली आबकारी नीति का मामला साल 2021-22 में लागू की गई शराब नीति में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़ा है। CBI का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति को इस तरह तैयार किया, जिससे चुनिंदा शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ मिले और इसके बदले में प्राप्त 'रिश्वत' की राशि का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी ने गोवा चुनाव में किया।
जहां एक तरफ सीबीआई केजरीवाल को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार बताते हुए दावा करती है कि उनके पास इसके पुख्ता सबूत और गवाह हैं, वहीं दूसरी तरफ केजरीवाल और उनकी पार्टी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई करार देते हैं। वर्तमान में यह मामला अदालती कार्यवाही के दौर में है, जिसमें सीबीआई निचली अदालत से मिलने वाली राहतों को हाई कोर्ट में चुनौती दे रही है, जबकि केजरीवाल अपनी बेगुनाही का दावा करते हुए रिहाई की मांग कर रहे हैं।
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