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दिल्ली के स्कूली बच्चों में अब निखरेगा हुनर, सरकार ने इस साल से शुरू किए ये काम

 Published : May 19, 2025 11:05 pm IST,  Updated : May 19, 2025 11:05 pm IST

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इसी एकेडमिक सत्र से सरकार स्किल बेस्ड पढ़ाई पर ध्यान देने जा रही है। विभाग ने सर्कुलर जारी किया है कि अब स्कूलों में प्री-वोकेशनल एजुकेशन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।

Delhi School- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : FILE PHOTO

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाई के साथ ही स्किल भी सिखाई जाएगी। जिससे बच्चे हुनरमंद बनकर निखरेंगे। दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने घोषणा की है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के हिसाब से शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए एक प्री-वोकेशनल एजुकेशन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।

फिर कक्षा 6 से 8 के बच्चों के होगी शुरू

दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने घोषणा की है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के हिसाब से शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए एक प्री-वोकेशनल एजुकेशन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय की वोकेशन एजुकेशन ब्रांच ने अपने जारी सर्कुलर के अनुसार, 'कौशल बोध' को पहले फेज में कक्षा 6 के लिए एक अलग विषय के रूप में शुरू किया जाएगा, इसके बाद आगामी सालों में इसे कक्षा 7 और 8 में भी शुरू किया जाएगा। 

तीन कैटेगरी पर होगा काम

इस पहल का उद्देश्य छात्रों को जरूरी लाइफ स्किल और वोकेशनल अवेयरनेस के मुताबिक तैयार करना है ताकि उन्हें असल दुनिया की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार किया जा सके। करिकुलम को स्कूली शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 के साथ जोड़ा गया है और यह काम की तीन कैटेगरी पर है - जीवन के साथ काम, मशीनों और सामग्रियों के साथ काम, और मानव सेवा में काम। इसमें कहा गया है कि छात्रों से तीनों कैटेगरी में से एक, हर साल 3 प्रोजेक्ट पूरे करने की उम्मीद की जाती है।

क्या-क्या सिखाया जाएगा?

इस प्रोग्राम में ऑर्गेनिक फॉर्मिंग, मिट्टी के बर्तन, बढ़ईगीरी, बाजरे से खाना बनाना, कढ़ाई और बुनियादी बिजली के काम जैसी गतिविधियों सिखाई जाएंगी। शिक्षक छात्रों को सुरक्षित तरीके से कार्य करने, समूहों में सहयोग करने और व्यावहारिक परिस्थितियों में अपने सीखने को लागू करने में मार्गदर्शन करेंगे।

सर्कुलर में कहा गया है कि हर एक छात्र का मूल्यांकन लिखित परीक्षा, मौखिक पेश करने का तरीका, एक्टिविटी बुक, पोर्टफोलियो और टीचर के ऑब्जर्वेशन के आधार पर किया जाएगा। साथ ही इन गतिविधियों के लिए हर साल कुल 110 घंटे भी दिए जाएंगे।

(इनपुट- PTI)

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