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शिक्षकों की पदोन्नति न करने पर डीटीए ने जाहिर की नाराजगी

दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के हिंदी विभाग में कार्यरत्त सहायट प्रोफेसर की कॉलेज द्वारा पदोन्नति नहीं किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है। डीटीए ने डीन ऑफ कॉलेजिज डॉ बलिराम पाणी से इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: June 10, 2021 19:14 IST
शिक्षकों की पदोन्नति...- India TV Hindi
Image Source : FILE शिक्षकों की पदोन्नति न करने पर डीटीए ने जाहिर की नाराजगी

नई दिल्ली दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के हिंदी विभाग में कार्यरत्त सहायट प्रोफेसर की कॉलेज द्वारा पदोन्नति नहीं किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है। डीटीए ने डीन ऑफ कॉलेजिज डॉ बलिराम पाणी से इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

दरअसल बुधवार को हिंदी विभाग में शिक्षकों की पदोन्नति की गई लेकिन प्रिंसिपल ने हिंदी के प्रोफेसर डॉ मीणा की पदोन्नति नहीं की । पदोन्नति न होने से नाराज डॉ मीणा बुधवार शाम 6 बजे से कॉलेज प्रांगण में अपनी पदोन्नति की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।धरने पर उनके साथ डॉ उमेश दुबे ,डॉ प्रकाशवीर खत्री, डॉ सुरेंद्र , डॉ बिजय प्रधान ,डॉ जोगेंद्र सिंह, डॉ प्रभाकर पलाका और अन्य शिक्षक बैठे हैं ।

धरने पर ही डीटीए के प्रभारी डॉ हंसराज सुमन ने डॉ मीणा से मुलाकात कर उन्हें संगठन की ओर से पूर्ण समर्थन दिया है। डॉ हंसराज सुमन ने कहा है कि वे यह पता लगवाएंगे कि आखिर इनकी पदोन्नति क्यों रोकी गई।

डॉ हंसराज सुमन ने बताया है कि बुधवार 9 जून को स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के हिंदी विभाग में शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया ऑन लाइन पूरी हुई जिसमें विभाग के चार शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया स्केल 7000 से 8000 में हुई। जिन शिक्षकों की पदोन्नति हुई उनमें अधिकांश की स्थायी नियुक्ति वर्ष 2015 में ही हुई थी।

डॉ सुमन ने बताया है कि कॉलेजों में लंबे समय से पदोन्नति नहीं हुई थी जिसके कारण शिक्षकों को हर महीने हजारों रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है । जब श्रद्धानंद कॉलेज में सभी विभागों के शिक्षकों की पदोन्नति हो रही है, तो डॉ. मीणा की पदोन्नति किस आधार पर रोकी गई?

स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में काफी समय से गवनिर्ंग बॉडी नहीं है । जो भी की पदोन्नति होनी है उसकी संस्तुति से एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के लिए गवनिर्ंग बॉडी का होना आवश्यक है। साथ ही इन पदों की पदोन्नति में गवनिर्ंग बॉडी का चेयरमैन बैठता है। कॉलेज में साल भर से गवनिर्ंग बॉडी से सदस्यों की सूची आने के बाद भी जानबूझकर गवनिर्ंग बॉडी नहीं बनाने से कॉलेज के रोजमर्रा के कार्यों में समस्या आ रही है। डॉ सुमन ने कहा कि ऐसे में प्राचार्य को कार्य करने की पूरी आजादी मिली हुई है इसलिए वह कुछ शिक्षकों को जानबूझकर परेशान कर रहे हैं ।

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजिज डॉ बलिराम पाणी से यह भी मांग की है कि वे कॉलेज से डॉ मीणा की पदोन्नति संबंधी आवेदन की फाइल मंगवाकर पता लगाएं कि किस आधार पर डॉ मीणा की पदोन्नति रोकी जा रही है । डॉ. सुमन ने गवनिर्ंग बॉडी के बनाने के लिए भी कॉलेज प्राचार्य को निर्देश जारी कर जल्द से जल्द बनाने की मांग की है ताकि एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर पदों पर पदोन्नति की जा सकें । उन्होंने बताया है कि हाल ही में दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों की गवनिर्ंग बॉडी को तीन महीने का एक्सटेंशन दिया है ,यह कॉलेज भी दिल्ली सरकार से वित्त पोषित है ।

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