नई दिल्ली: इंडिया टीवी स्पीड न्यूज एजुकेशन कॉन्क्लेव में देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति से लेकर अन्य सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से शिक्षा व्यवस्था में काफी बदलाव आएगा। धर्मेंद्र प्रधान ने कोचिंग सेंटर्स के बारे में कहा कि उनके लिए गाइडलाइन दी गई है। केंद्र ने राज्यों को एडवाइजरी जारी की है। धर्मेंद्र प्रधान ने एनईपी को लेकर तमिलनाडु के सीएम स्टालिन के विरोध से जुड़े सवाल पर कहा कि तमिलनाडु के सीएम अपनी नाकामी को छिपाने के लिेए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का विरोध कर रहे हैं। एनईपी कहता है कि पढ़ाई मातृभाषा में होनी चाहिए। क्लास 8 तक अगर होगी तो इससे बढ़िया बौद्धिक विकास होगा। एनईपी में किसी भाषा को किसी पर थोपने की बात नहीं कही गई है। वो एक काल्पनिक विरोध कर रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तमिलनाडु में पढ़ाई तमिल में होगी इसका जिक्र एनईपी में किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने तमिल भाषा के लिए जितना प्रयास किया उतना किसी ने नहीं किया। तमिल भाषा को आज देशभर में नए सिरे से स्थापित किया जा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्टालिन की कुछ राजनीतिक मजबूरियां हैं इसलिए वह इसका विरोध कर रहे हैं। निहित स्वार्थों के लिए ऐसा किया गया है।
हिंदी को थोपने की बात नहीं
उन्होंने कहा कि एनईपी में कहीं भी हिंदी को थोपने की बात नहीं है। एनईपी में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि मातृभाषा आधारित शिक्षा दी जाएगी। जापान, इजरायल, चीन जैसे देश अपनी भाषा में क्रिटिकल एनालाइसिस करते हैं इसलिए इनमें क्रिटिकल थिंकिंग ज्यादा है।
स्कूल एजुकेशन 15 साल का
उन्होंने कहा कि एनईपी के तहत स्कूल एजुकेशन 15 साल का हो गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों बाल वाटिका पर फॉर्मल एजुकेशन के साथ-साथ न्यूट्रूशन पर ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद प्राइमरी, सकेंडरी, मिडिल के आधार पर विभाजन किया गया है। अब स्किल एजुकेशन, स्पोर्ट्स पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। छठी से 12 वीं तक स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जाएगा। 11-12 में स्पेशियलिटी की ओर ले जाया जाएगा। नई पीढ़ी को टेक्नोलॉजी के हिसाब से ट्रेनिंग दी जाएगी।
10 वीं बोर्ड की परीक्षा दो बार कराए जाने के सवाल पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
10 वीं बोर्ड की परीक्षा दो बार कराए जाने के सवाल पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा-'परीक्षा बच्चों को लिए एक प्रेशर की चीज है। सबके मन में है कि परीक्षा आसान हो। भारत दुनिया में पहला देश होगा जहां प्रधानमंत्री खुद बच्चों के बीच आते हैं। बच्चों को छोटे-छोटे टिप्स देते हैं। एनईपी के तहत हम जनवरी और अप्रैल में दो बार परीक्षा देने का मौका देंगे। दोनों में से जिसमें अच्छे नंबर आएंगे उसको ऑप्ट करेगा।
अभी इसे परामर्श के लिए पब्लिक डोमेन में रखा गया है। रुचि आधारित एजुकेशन पर हमारा जोर है। नई पीढ़ी में बच्चे बिल्कुल फोकस हैं। डिग्री महत्वपूर्ण है लेकिन हमारी योग्यता और क्षमता मजबूत होनी चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनईपी में कहा गया है कि 10 साल बाद इसकी हम समीक्षा करेंगे। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनईपी से हमारे बच्चे दुनिया में लीडरशिप की पोजिशन पर आ जाएंगे।