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Boycott Turkey: JNU ने तुर्की यूनिवर्सिटी से तोड़ा करार, कहा- जेएनयू राष्ट्र के साथ खड़ा है

Written By: Shailendra Tiwari @@Shailendra_jour Published : May 14, 2025 06:33 pm IST, Updated : May 14, 2025 09:09 pm IST

JNU ने तुर्की की एक यूनिवर्सिटी से अपना एक एमओयू तोड़ दिया है। बता दें कि भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया और पाकिस्तान ने भारत पर तुर्की द्वारा दिए गए ड्रोन से ही हमला किया था।

JNU- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO JNU

भारत पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान को हथियार सप्लाई किए जान के कारण पूरा देश तुर्की के समानों को बॉयकॉट कर रहा है। इसी बीच खबर आ रही है कि जेएनयू यानी जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी ने तुर्किये की इनोनू यूनिवर्सिटी से अपना समझौता करार तोड़ किया है। जेएनयू ने इसकी जानकारी एक ट्वीट के माध्यम से दी है।

जेएनयू देश के साथ खड़ा है

जेएनयू ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी कि राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से जेएनयू और  तुर्किये की इनोनू यूनिवर्सिटी के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) को अगली सूचना तक सस्पेंड कर दिया गया है। जेएनयू इस समय देश के साथ खड़ा है। 

क्यों की गई थी एएमयू साइन?

जानकारी दे दें कि यह एमएयू मूल रूप से एकेडमिक सहयोग, रिसर्च आदान-प्रदान और छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए साइन किया गया था, जो भारतीय यूनिवर्सिटीज द्वारा इंटरनेशनल कोलाबोरेशन को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। हालाँकि, हाल ही में पाकिस्तान के साथ तुर्की के बढ़ते रक्षा सहयोग सहित कूटनीतिक तनाव ने संभावित सुरक्षा जोखिमों पर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

जेएनयू कुलपति ने कही ये बात

जेएनयू कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने इसे लेकर एक बयान दिया कि यह जेएनयू द्वारा हस्ताक्षरित अन्य शैक्षणिक समझौता ज्ञापनों की तरह रिसर्च और टीचिंग को लेकर आपसी सहयोग ही था। दो स्कूल एसएलएल एंड सीएस में शामिल हैं, जहां एक फैकल्टी है जो भाषा, साहित्य और संस्कृति पढ़ाता है। एसआईएस विश्व मामलों में तुर्की के साथ काम करता है। जेएनयू ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से समझौता ज्ञापन को निलंबित कर दिया है क्योंकि जेएनयू राष्ट्र और सशस्त्र बलों के साथ खड़ा है, जिनमें से कई जेएनयू के पूर्व छात्र हैं।

तुर्की ने दिया था पाकिस्तान का साथ

जानकारी दे दें कि यह कदम जेएनयू द्वारा तुर्की के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के बाद उठाया गया है, जो भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान का साथ देने के कारण सामने आ गया है। दोनों (पाकिस्तान और तुर्की) देशों ने हाल के वर्षों में सैन्य संबंधों का विस्तार किया है, जिसमें तुर्की पाकिस्तान को ड्रोन और नेवी प्लेटफॉर्म सहित एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी की आपूर्ति करता है। इस साझेदारी को भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए संभावित खतरे के रूप में माना है, जिससे आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिरोध बढ़ गई है।

क्यों हो रहा तुर्की का विरोध?

जानकारी दे दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में छिपे कई आतंकी अड्डों को खत्म किया, जिसके बाद बौखलाहट में पाक ने भारत पर तुर्की के ड्रोन और चीनी मिसाइल से हमला किया। हालांकि भारत ने इसे अपने एयर डिफेंस की मदद से आसमान में ही मार गिराया। इसके बाद तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया, जिसके बाद भारत में तुर्की के सामनों को बैन करने की मांग उठ रही है और लोग तुर्की के सामान का बहिष्कार भी कर रहे हैं।

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