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हिमाचल और गुजरात चुनाव की तारीख एकसाथ क्यों नहीं की घोषित? निर्वाचन आयोग ने बताई ये वजह

Edited By: Swayam Prakash @swayamniranjan_ Published : Oct 14, 2022 09:10 pm IST, Updated : Oct 19, 2022 04:23 pm IST

चुनाव आयोग ने आज हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा तो कर दी लेकिन गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीख नहीं बताई। इसको लेकर समूचा विपक्ष सवाल उठा रहा है। लिहाजा चुनाव आयोग ने इसको लेकर कारण बताया है।

Chief election commissioner Rajiv Kumar - India TV Hindi
Image Source : PIB Chief election commissioner Rajiv Kumar

Highlights

  • जल्द ही गुजरात चुनाव की तारीख का ऐलान संभव
  • गुजरात में कुल 182 सीटों पर होना है चुनाव
  • 8 दिसंबर को ही हिमाचल के साथ गुजरात की नतीजे भी आएंगे

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। हालांकि हर कोई उम्मीद कर रहा था कि आयोग हिमाचल प्रदेश के साथ ही गुजरात विधानसभा चुनावों की तारीखों की भी घोषणा करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसको लेकर अब विपक्षी नेता इस फैसले पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसको लेकर अब चुनाव आयोग ने बयान दिया है कि हिमाचल और गुजरात में एकसाथ विधानसभा चुनाव की घोषणा नहीं करने के लिए 2017 में अपनाई गई परंपरा निभाने की बात कही है।

दोनों राज्यों में चुनावों की घोषणा क्यों नहीं?

हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनावों की तारीख साथ में घषित नहीं करने को लेकर निर्वाचन आयोग ने 2017 में अपनाई गई परंपरा का उल्लेख  किया और कहा कि इस बार आदर्श आचार संहिता को "अनावश्यक रूप से बढ़ाया" नहीं गया है। निर्वाचन आयोग ने एकसाथ दोनों राज्यों में चुनावों की घोषणा क्यों नहीं की, इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने कहा, ‘‘आयोग वास्तव में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने में परंपरा का पालन करता है। आयोग ने पिछली परंपरा का अनुसरण किया।’’ 

पिछले चुनाव एकसाथ हुई थी मतगणना
बता दें कि साल 2017 में, दोनों राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर चुनाव की घोषणा की गई थी, लेकिन मतगणना 18 दिसंबर को एकसाथ हुई थी। निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। अधिसूचना 17 अक्टूबर को जारी की जाएगी और मतदान 12 नवंबर को होगा। मतों की गिनती 8 दिसंबर को होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या गुजरात के लिए मतों की गिनती 8 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश के साथ ही होगी, कुमार ने कहा, ‘‘जब हम गुजरात चुनाव की घोषणा करेंगे, तो हम आपको यह बताएंगे।’’ 

विपक्षी नेताओं ने उठाए कई सवाल
तकनीकी रूप से, नवंबर-दिसंबर की अवधि में गुजरात चुनाव कराना अभी भी संभव है, ताकि मतों की गिनती एक ही दिन की जा सके, जैसा कि 2017 में हुआ था। कुछ विपक्षी नेताओं ने कहा कि गुजरात चुनावों की घोषणा बाद में करने से मौजूदा सरकार को आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले और अधिक कल्याणकारी योजनाओं को शुरू करने का मौका मिल सकता है। कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने परंपरा का पालन करते हुए वास्तव में इसे "परिष्कृत" किया। उन्होंने कहा कि 2017 और 2012 में जब दोनों चुनाव साथ हुए थे तब आदर्श आचार संहिता की अवधि 70 दिनों से घटाकर 57 दिन (2017) और 81 दिनों से घटाकर 57 दिन (2012) कर दी गई थी। साल 2017 के चुनाव की तुलना में परिणाम का इंतजार दो हफ्ते कम कर दिया गया है। 

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताई ये वजह
सीईसी ने कहा, "चुनाव की तैयारी और संचालन बहुत विस्तृत कवायद है और इसमें विभिन्न कारकों, सभी हितधारकों के साथ परामर्श और अन्य कारकों को ध्यान में रखा जाता है।’’ उन्होंने कहा कि एक चुनाव के परिणाम का दूसरे पर प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मौसम बहुत महत्वपूर्ण कारक है, खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में। कुमार ने कहा, ‘‘हर चीज की पड़ताल करने के बाद, निर्वाचन आयोग ने उस परंपरा का पालन करने का फैसला किया, जिसका पालन पिछली बार किया गया था।"

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