मुंबई: प्रसिद्ध अभिनेत्री और रंगकर्मी सुलभा देशपांडे का शनिवार को 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। हिंदी और मराठी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री सुलभा देशपांडे का मुंबई स्थित घर पर निधन हो गया। उनके पारिवारिक सूत्रों के अनुसार देशपांडे लंबे समय से बीमार चल रही थीं, वे 79 साल की थीं और इसके साथ ही मुंबई स्थित घर पर उन्होंने अपनी आखिरी सांसें लीं। फ़िल्मों के अलावा वह थियेटर और छोटे पर्दे पर भी समान रूप से सक्रिय थीं।
विजय तेंदुलकर जैसे प्रख्यात नाट्य लेखकों द्वारा लिखे नाटकों में अभिनय करने वाली सुलभा ने कई मराठी और हिन्दी फिल्मों तथा टीवी सीरियलों में काम किया था। इनमें तमन्ना, विरासत, याराना, खून भरी मांग और इंग्लिश विंग्लिश जैसी कई सफल फिल्मों के नाम शामिल हैं।
हिन्दी सिनेमा में उन्होंने 'भूमिका' (1977), अरविंद देसाई की अजीब दास्तां (1978), 'गमन' (1978) में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हाल के दिनों में वह गौरी शिंदे निर्देशित फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' में नजर आई थीं।
देशपांडे आखिरी बार टेलीविजन पर 'अस्मिता' सीरियल में नजर आई थीं। इसके अलावा इन्होंने 'बदलते रिश्ते' (1996) और 'कहता है दिल जी ले जरा' (2014) सीरियलों में भी काम किया। 1977 में आई श्याम बेनेगल की फिल्म 'भूमिका' से इन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा।
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अभिनेत्री रीमा लागू ने बातचीत में बताया कि उनके निधन से मराठी -हिंदी रंगमंच और फिल्म इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नुक़सान हुआ है। मराठी रंगमंच में उन्होंने बहुत काम किया है। सिनेमा और कला जगत से जुड़े कई लोगों ने उनके निधन पर शोक प्रकट किया।
"सुलभा जी ने अविष्कार नाम की एक संस्था बनाई थी जहां ख़ास तौर से छोटे बच्चों के लिए संगीतमय नाटक बनाने और उन्हें सिखाने का काम करतीं थीं।"
रीमा ने कहा, "वो आख़िरी समय तक अपने इस काम में मग्न रहीं। वो अपने काम के लिए बेहद समर्पित और अनुशासित थी। अपने काम से शुरू से ही उन्हें लगाव रहा, उनकी बातों से मैं बहुत सीखती थी।"
सुलभा जी ने सईद मिर्जा, गोविंद निहलानी और गुलजार के साथ भी काम किया था। इसके साथ ही ये शांतता! कोर्ट चालू आहे' से काफी चर्चित हुईं थीं। 1967 में देशपांडे ने विजय तेंडुलकर के नाटक 'शांतता! कोर्ट चालू आहे' में यादगार भूमिका निभाई थी। इस नाटक में लीना बेनारे के रूप में देशपांडे का रोल बहुत चर्चित हुआ था देशपांडे ने फेमस प्लेराइटर विजय तेंडुलकर के लिए बच्चों का नाटक भी लिखा था।
1971 में इस पर बनी फिल्म में भी देशपांडे ने काम किया। मराठी फिल्मों में इनकी चौकट राजा (1991), जैत रे जैत (1977) प्रमुख है।देशपांडे जाने-माने मराठी एक्सपेरिमेंटल थियेटर 'रंगायन' से जुड़ी थीं। इन्होंने इस थियेटर में विजय तेंडुलकर, विजय मेहता, डॉ. श्रीराम लागू और सत्यदेव दुबे के साथ काम किया। देशपांडे ने इस ग्रुप के जरिए सेंट्रल मुंबई के एक स्कूल में राइटिंग और एक्टिंग के लिए एक बड़ा मंच प्रोवाइड कराया था।
थियेटर ग्रुप 'अविष्कार' की को-फाउंडर थीं और इन्होंने अपने हसबैंड अरविंद देशपांडे के साथ यह ग्रुप बनाया था। अविष्कार' में बच्चों के लिए एक सेक्शन 'चंद्रशाला' भी था। अरविंद देशपांडे की 1987 में डेथ हो गई थी। सुलभा देशपांडे का जन्म 1937 में मुंबई में हुआ था और इन्होंने करियर की शुरुआत इन्होंने दबीलदास हाईस्कूल में एक टीचर के तौर शुरू किया था। हिंदी-मराठी रंगमंच में योगदान के लिए उनको वर्ष 1987 में संगीत-नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।