नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी इन दिनों आगामी फिल्म ‘नाम शबाना’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। बाजपेयी ने अब तक के अपने फिल्मी करियर में कई जबरदस्त और चुनौतिपूर्ण किरदारों को बखूबी पर्दे पर उतारा है। बाजपेयी को उन अभिनेताओं में से एक कहा जाता है जो हर तरह की भूमिकाओं को रियल टच देकर पर्दे पर निभाते हैं। लेकिन अभिनेता का मानना है कि व्यवसायिक सिनेमा भले ही बॉक्स ऑफिस पर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर ले लेकिन ऐसी फिल्में लंबे वक्त तक याद नहीं रखी जाती हैं।
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2 बार राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाले बाजपेयी को बड़े पर्दे पर उनकी कई तरह की भूमिकाओं के लिए जाना जाता है। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में चाहे एक गैंगस्टर की भूमिका हो या ‘राजनीति’ में एक तेज-तर्रार राजनेता की, वाजपेयी ने सभी तरह की भूमिकाएं की हैं। उनका मानना है कि ऑफबीट फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता लंबे समय तक दर्शकों के मनो-मस्तिष्क में अपना स्थान बनाए रखते हैं।
बाजपेयी ने बताया, “यहां, आमतौर पर मुख्यधारा की सिनेमा थियेटरों में चलती हैं। और इसके बाद लोग इसे टीवी पर भी दिखते हैं। लेकिन एक निश्चित समय पर उनका समय पूरा हो जाता है और उस समय हमारी फिल्मों का जीवन शुरू होता है। यह पूरे जीवन भर के लिए है।“
उन्होंने कहा, “यह पूरी दुनिया में पसंद की जाती है। ऐसे में यह इसकी खूबसूरती है। हम लोग अपनी फिल्मों के जरिए हमेशा लोगों के लिए उपलब्ध हैं। वे किसी के कहने या किसी की सलाह पर हमारी फिल्में देखते हैं। यह इन फिल्मों की खूबसूरती है जो इन्हें दीर्घकालीन बनाती है।“