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Explainer: अब स्पेस में ही अंतरिक्ष यान बदल सकेगा इंसान, जानिए ISRO की 'डॉकिंग' टेक्निक और कैसे करता है ये काम?

 Published : Dec 31, 2024 01:22 pm IST,  Updated : Dec 31, 2024 02:02 pm IST

इसरो ने SpaDeX Mission को लॉन्च करके नया कीर्तिमान रचा है। रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है, जिसके पास डॉकिंग करने की टेक्नोलॉजी है।

ISRO Docking Technique- India TV Hindi
इसरो की डॉकिंग टेक्निक Image Source : FILE PHOTO

स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने नया इतिहास रच दिया है। इसरो ने अपने SpaDeX Mission की न सिर्फ सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की बल्कि इसे अंतरिक्ष में डॉकिंग कराने में भी कामयाब हासिल की है। अंतरिक्ष में इसरो की ये उड़ान ऐतिहासिक है। इस उड़ान के जरिए इसरो ने अपने PSLV-C60 SpaDeX मिशन को लॉन्च कर दिया है। इसमें 'डॉकिंग' टेक्निक का खास महत्व है।

पीएसएलवी रॉकेट से हुई सफल लॉन्चिंग

सोमवार रात दस बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी रॉकेट के जरिए इसकी सफल लॉन्चिंग की गई। इसरो की ये लॉन्चिंग कितनी खास है, इसका अंदाजा आप इसरो के दफ्तर में बैठे वैज्ञानिकों के चेहरे पर दिखी खुशी से लगा सकते हैं।

ऐसा करने वाला भारत बना दुनिया का चौथा देश

इसरो के वैज्ञानिकों ने इस मिशन को लॉन्च करने के लिए दो उपग्रहों का इस्तेमाल किया है। इनके नाम चेजर और टारगेट है। इनका वजन 220 किलो है। ये मिशन भारत के लिए किसी ऐतिहासिक मौके से कम नहीं है। इस मिशन की कामयाबी से रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है, जिसके पास स्पेस में डॉकिंग करने की टेक्नोलॉजी आ गई है।

SpaDeX Mission लॉन्च
Image Source : INDIA TV GFXSpaDeX Mission लॉन्च

क्या है डॉकिंग सिस्टम?

डॉकिंग एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें दो अंतरिक्ष यान पृथ्वी की परिक्रमा करते समय आपस में जुड़ते हैं। SpaDeX का मतलब, स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (Space Docking Experiment) है। इस मिशन में पीएसएलवी-सी 60 से छोड़े जाने वाले दो छोटे अंतरिक्ष यान की डॉकिंग की गई है। डॉकिंग का मतलब होता है स्पेस में दो अंतरिक्ष यानों या सैटेलाइट को जोड़ना और अनडॉकिंग का मतलब अंतरिक्ष में रहते हुए इन दोनों को अलग करना है।

इंसान को एक अंतरिक्ष यान से दूसरे यान में भेजा जा सकेगा

इसरो चीफ एस. सोमनाथ ने बताया कि डॉकिंग मंगलवार से शुरू होगी और फाइनल डॉकिंग 7 जनवरी तक पूरी होने की उम्मीद है। इसरो के मुताबिक, स्पैडेक्स मिशन का प्राथमिक उद्देश्य दो छोटे अंतरिक्ष यानों SDX 01 और SDX 02 के पृथ्वी की निचली वृत्ताकार कक्षा में मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी का विकास और प्रदर्शन करना है। ये एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से इंसान को एक अंतरिक्ष यान से दूसरे अंतरिक्ष यान में भेज पाना संभव होता है। 

डॉकिंग सिस्टम
Image Source : INDIA TV GFXडॉकिंग सिस्टम

अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने में SpaDeX की अहम भूमिका

इस मिशन को लॉन्च करने के बाद इन्हें डॉकिंग के जरिए जोड़ने और अनडॉकिंग की प्रॉसेस से अलग-अलग करने का प्रयोग किया जाएगा। इस मिशन का लक्ष्य है कि चेजर अपने टार्गेट का पीछा करे। ये प्रक्रिया भविष्य के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने में अहम साबित हो सकती है। भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना चाहता है। भारत कि इस मुहिम में SpaDeX मिशन बेहद महत्वपूर्ण है।

वैश्विक चमत्कारों से दुनिया को मंत्रमुग्ध कर रहा ISRO

केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने इसरो की तारीफ करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मुझे ऐसे समय में अंतरिक्ष विभाग से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जब ISRO की टीम एक के बाद एक वैश्विक चमत्कारों से दुनिया को मंत्रमुग्ध कर रही है। भारत अपने स्वदेशी रूप से विकसित 'भारतीय डॉकिंग सिस्टम' के माध्यम से स्पेस डॉकिंग करने वाले देशों की चुनिंदा लीग में शामिल होने वाला सिर्फ चौथा देश है।'

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