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फेफड़ों को हेल्दी बनाने के लिए रोजाना करें ये ब्रीदिंग एक्सरसाइज, जान लें करने का सही तरीका

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Jan 31, 2025 02:03 pm IST,  Updated : Jan 31, 2025 02:14 pm IST
प्रदूषण बढ़ने से हमारे फेफड़ों पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे फेफड़े कमजोर पड़ जाते हैं और ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। इस वजह से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, जैसी जानलेवा बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सबसे जरूरी हैं कि आप अपने फेफड़ों को हेल्दी रखे। हेल्दी लंग्स के लिए हमारे शरीर में ऑक्सीजन का सही ढंग से पहुंचना बहुत आवश्यक है। ऐसे में अपने फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए अपनी डेली लाइफ में इन प्राणायाम को शामिल करें। ये एक्सरसाइज आपके फेफड़ों को मजबूत बनाएंगे।
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प्रदूषण बढ़ने से हमारे फेफड़ों पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे फेफड़े कमजोर पड़ जाते हैं और ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। इस वजह से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, जैसी जानलेवा बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सबसे जरूरी हैं कि आप अपने फेफड़ों को हेल्दी रखे। हेल्दी लंग्स के लिए हमारे शरीर में ऑक्सीजन का सही ढंग से पहुंचना बहुत आवश्यक है। ऐसे में अपने फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए अपनी डेली लाइफ में इन प्राणायाम को शामिल करें। ये एक्सरसाइज आपके फेफड़ों को मजबूत बनाएंगे।
भस्त्रिका प्राणायाम हाइपरटेंशन, अस्थमा, हार्ट संबंधी बीमारी, टीवी, ट्यूमर, बीपी, लिवर सिरोसिस, साइनस, किसी भी तरह की एनर्जी और फेफड़ों के लिए अच्छा माना जाता है। इस योग को 3 तरह से किया जाता है। पहले में 5 सेकंड में सांस ले और 5 सेकंड में सांस छोड़े। दूसरे में ढाई सेकंड सांस लें और ढाई सेकंड में छोड़ें। तीसरा तेजी के साथ सांस लें और छोड़े। इस प्राणायाम को लगातार 5 मिनट करें।
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भस्त्रिका प्राणायाम हाइपरटेंशन, अस्थमा, हार्ट संबंधी बीमारी, टीवी, ट्यूमर, बीपी, लिवर सिरोसिस, साइनस, किसी भी तरह की एनर्जी और फेफड़ों के लिए अच्छा माना जाता है। इस योग को 3 तरह से किया जाता है। पहले में 5 सेकंड में सांस ले और 5 सेकंड में सांस छोड़े। दूसरे में ढाई सेकंड सांस लें और ढाई सेकंड में छोड़ें। तीसरा तेजी के साथ सांस लें और छोड़े। इस प्राणायाम को लगातार 5 मिनट करें।
 अनुलोम विलोम को करने से श्वसन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव है और फेफड़े हेल्दी होते हैं। रीढ़ की हड्डी को सीधाकर आराम से बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। सबसे पहले अंगूठे को दाहिनी नासिका पर रखें। हल्के दबाव के साथ नथुने को ढककर, बाएं नथुने से धीरे धीरे सांस छोड़ें। पूरी तरह से सांस छोड़ने के बाद कुछ सेकंड का ब्रेक लें और अब अपनी अनामिका को बाएं नथुने पर रखें। इसी तरह के कम से कम 5 बार ऐसा करें। यह आसान त्वचा संबंधी, डायबिटीज, के साथ पाचन तंत्र को फिट रखने में मदद करता है।
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अनुलोम विलोम को करने से श्वसन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव है और फेफड़े हेल्दी होते हैं। रीढ़ की हड्डी को सीधाकर आराम से बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। सबसे पहले अंगूठे को दाहिनी नासिका पर रखें। हल्के दबाव के साथ नथुने को ढककर, बाएं नथुने से धीरे धीरे सांस छोड़ें। पूरी तरह से सांस छोड़ने के बाद कुछ सेकंड का ब्रेक लें और अब अपनी अनामिका को बाएं नथुने पर रखें। इसी तरह के कम से कम 5 बार ऐसा करें। यह आसान त्वचा संबंधी, डायबिटीज, के साथ पाचन तंत्र को फिट रखने में मदद करता है।
भ्रामरी प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में आराम दिलाता है। भ्रामरी प्राणायाम से ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके शरीर को रोगों से दूर रखा जा सकता है। सबसे पहले पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब अंदर गहरी सांस भरते हैं। सांस भरकर पहले अपनी अंगूलियों को ललाट में रखते हैं। जिसमें 3 अंगुलियों से आंखों को बंद करते हैं। अंगूठे से कान को बंद कते हैं। मुंह को बंदकर 'ऊं' का नाद करते हैं। इस प्राणायाम को 3-21 बार किया जा सकता है। इस आसन को करने से तनाव से मुक्ति के साथ मन शांत रहेगा। ​​
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भ्रामरी प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में आराम दिलाता है। भ्रामरी प्राणायाम से ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके शरीर को रोगों से दूर रखा जा सकता है। सबसे पहले पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब अंदर गहरी सांस भरते हैं। सांस भरकर पहले अपनी अंगूलियों को ललाट में रखते हैं। जिसमें 3 अंगुलियों से आंखों को बंद करते हैं। अंगूठे से कान को बंद कते हैं। मुंह को बंदकर 'ऊं' का नाद करते हैं। इस प्राणायाम को 3-21 बार किया जा सकता है। इस आसन को करने से तनाव से मुक्ति के साथ मन शांत रहेगा। ​​
कपालभाति करने से फेफड़ों की वायुधारण क्षमता में वृद्धि होती है। यानी कपालभाति फेफड़ों को लाभ पहुंचाता है , पाचन में सुधार करता है और चयापचय को बढ़ाता है। विषहरण में मदद करता है। सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। अब दोनों नथुना से गहरी सांस भीतर की ओर लें। अब सांस को बाहर की तरफ छोड़ दें। सांस को बल पूर्वक बाहर निकालना है और आराम से भीतर लेना है। इस तरह से कम से कम 20 बार ऐसा करें।
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कपालभाति करने से फेफड़ों की वायुधारण क्षमता में वृद्धि होती है। यानी कपालभाति फेफड़ों को लाभ पहुंचाता है , पाचन में सुधार करता है और चयापचय को बढ़ाता है। विषहरण में मदद करता है। सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। अब दोनों नथुना से गहरी सांस भीतर की ओर लें। अब सांस को बाहर की तरफ छोड़ दें। सांस को बल पूर्वक बाहर निकालना है और आराम से भीतर लेना है। इस तरह से कम से कम 20 बार ऐसा करें।
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