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सेल्फी लेना बन गया है जुनून, तो सावधान! बिगड़ेगी मेंटल हेल्थ, डैमेज हो सकता दिमाग

Selfitis Syndrome: सेल्फी के दीवानें तो जान लें कैसे ये जुनून आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। युवाओं में सेल्फी ट्रेंड 'सेल्फाइटिस सिंड्रोम' का कारण बन रहा है। जिससे हार्मोन्स में गड़बड़ी आने लगती है और दिमागी संतुलन बिगड़ने लगता है।

Written By: Bharti Singh
Published : Jul 08, 2025 09:13 am IST,  Updated : Jul 08, 2025 09:13 am IST
पिछले कुछ सालों में सेल्फी का क्रेज इतना बढ़ गया है कि अब ये शौक सिंड्रोम में बदल रहा है, जिसे 'सेल्फाइटिस' कहा जा रहा है। सेल्फाइटिस और जिसकी गिरफ्त में हर उम्र के लोग हैं।
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पिछले कुछ सालों में सेल्फी का क्रेज इतना बढ़ गया है कि अब ये शौक सिंड्रोम में बदल रहा है, जिसे 'सेल्फाइटिस' कहा जा रहा है। सेल्फाइटिस और जिसकी गिरफ्त में हर उम्र के लोग हैं।
सेल्फाइटिस सिंड्रोम का मामला इतना गंभीर है कि इस पर दुनिया भर में रिसर्च हो रही हैं। हाल ही में जो स्टडी सामने आई है उसके मुताबिक ये 'सेल्फी फीवर' मेंटल हेल्थ-हार्मोनल हेल्थ-ब्लड सर्कुलेशन पर गहरा असर छोड़ रहा है।
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सेल्फाइटिस सिंड्रोम का मामला इतना गंभीर है कि इस पर दुनिया भर में रिसर्च हो रही हैं। हाल ही में जो स्टडी सामने आई है उसके मुताबिक ये 'सेल्फी फीवर' मेंटल हेल्थ-हार्मोनल हेल्थ-ब्लड सर्कुलेशन पर गहरा असर छोड़ रहा है।
दूसरी बीमारियों की तरह ही 'सेल्फाइटिस' की भी तीन कैटेगरी हैं। पहला 'बॉर्डर लाइन' इसमें वे लोग आते हैं, जो दिन भर में तीन सेल्फी लेते हैं। लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं करते।
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दूसरी बीमारियों की तरह ही 'सेल्फाइटिस' की भी तीन कैटेगरी हैं। पहला 'बॉर्डर लाइन' इसमें वे लोग आते हैं, जो दिन भर में तीन सेल्फी लेते हैं। लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं करते।
दूसरा है 'एक्यूट सेल्फाइटिस सिंड्रोम', इसमें दिन भर में तीन या उससे ज्यादा सेल्फी लेते हैं और अपलोड भी करते हैं। आखिरी है 'क्रोनिक सेल्फाइटिस सिंड्रोम' इसमें दिन भर में कम से कम छह सेल्फी लेते हैं। सभी को सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं और फिर दिन भर पोस्ट पर रिएक्शन देखते रहते हैं।
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दूसरा है 'एक्यूट सेल्फाइटिस सिंड्रोम', इसमें दिन भर में तीन या उससे ज्यादा सेल्फी लेते हैं और अपलोड भी करते हैं। आखिरी है 'क्रोनिक सेल्फाइटिस सिंड्रोम' इसमें दिन भर में कम से कम छह सेल्फी लेते हैं। सभी को सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं और फिर दिन भर पोस्ट पर रिएक्शन देखते रहते हैं।
लाइक्स-कमेंट्स आये तो खुश हो जाते हैं, लेकिन वो नोटिस न हो तो डिप्रेस हो जाते हैं। नतीजा मूड स्विंग्स, नींद की कमी और इमोशनल 'रोलर कोस्टर राइड' से बॉडी में तमाम हार्मोन्स का उथल-पुथल शुरु हो जाता है।
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लाइक्स-कमेंट्स आये तो खुश हो जाते हैं, लेकिन वो नोटिस न हो तो डिप्रेस हो जाते हैं। नतीजा मूड स्विंग्स, नींद की कमी और इमोशनल 'रोलर कोस्टर राइड' से बॉडी में तमाम हार्मोन्स का उथल-पुथल शुरु हो जाता है।
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