Published : Jan 29, 2026 10:11 pm IST, Updated : Jan 29, 2026 10:11 pm IST
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दिल्ली के सफदरजंग एनक्लेव में उस समय सन्नाटा छा गया जब पायलट शांभवी पाठक के पार्थिव शरीर को उनके आवास पर लाया गया। शोक संतप्त रिश्तेदारों के पाठक के घर पहुंचने लगे तो आसपास रहने वाले लोग दबी आवाज में बातें करते रहे।
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बारामती के पास हुए प्लेन क्रैश में मारे गए 5 लोगों में 25 साल की शांभवी पाठक भी शामिल थीं। प्लेन में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार भी सवार थे।
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निधन की खबर मिलते ही पाठक के पड़ोसी चुपचाप गली में इकट्ठा हो गए। कुछ ने हाथ जोड़ रखे थे, तो कुछ की आंखों में आंसू थे।
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कुछ देर बाद परिवार लोधी रोड श्मशान घाट के लिए रवाना हुआ, जहां करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों की मौजूदगी में पाठक का अंतिम संस्कार किया गया।
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शांभवी का आज लोधी गार्डन शमशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। उनके भाई वरुण ने मुखाग्नि दी।
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शांभवी पाठक का घर का नाम चीनी था। शांभवी ने उड़ान भरने से पहले ग्वालियर में रह रहीं अपनी दादी को आखिरी संदेश 'गुड मॉर्निंग' भेजा था।
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ग्वालियर के बसंत विहार में रहने वाली शांभवी की दादी मीरा पाठक ने बताया कि करीब 11 बजे उनके छोटे बेटे ने फोन करके यह जानकारी दी थी कि जिस विमान दुर्घटना में अजित पवार की मौत हुई है, उसमें शांभवी भी थी।
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मीरा पाठक की पड़ोसी ऊषा उनियाल ने कहा कि शांभवी पढ़ने लिखने में बेहद होशियार और स्वभाव में थोड़ी चुलबुली थी। उन्होंने बताया कि वह कभी भी ग्वालियर आती तो अपनी दादी से मिलने का कोई मौका नहीं छोड़ती थी।
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पड़ोसियों ने बताया कि दंपति अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में जुटा था। जिस बेटी को दुल्हन बनाकर विदा करना था, उसका शव देख पिता फफक-फफककर रो पड़े।
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शांभवी के निधन के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, इस इलाके में पहले कभी ऐसी खामोशी नहीं देखी गई। लोग बस खड़े थे, कुछ बोल नहीं रहे थे, मानो उनके पास शब्द ही ना हों।