Published : Dec 29, 2025 06:15 pm IST, Updated : Dec 29, 2025 06:15 pm IST
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अगर आपने गौर किया हो तो ये पाया होगा कि सभी मोबाइल या लैपटॉप के चार्जर का कलर व्हाइट या ब्लैक ही होता है, क्या आपने कभी इसकी वजह पर गौर किया है? अगर नहीं तो आज यहां पर इसकी वजह के बारे में बता रहे हैं।
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व्हाइट या ब्लैक चार्जर की वजह से चार्जर से निकलने वाली हीट को सरलता से बाहर किया जा सकता है और चार्जिंग के समय जेनरेट होने वाली हीट उसमें ट्रैप नहीं होती जिससे चार्जर और उससे कनेक्टेड डिवाइस को ओवरहीट होने से रोकथाम कर सकते हैं। इस तरह चार्जर और डिवाइस दोनों की सेफ्टी के लिए ही ये कलर का साइंस काफी कारगर है।
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काला रंग गर्मी को बेहतर तरीके से सोखता और बाहर निकालता है, जिससे चार्जर के अंदर का तापमान बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता है। सफेद रंग बाहर की गर्मी को रिफ्लेक्ट करता है, जिससे चार्जर धूप या गरम वातावरण में बाहर से गर्म नहीं होता।
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न्यूट्रल कलर के साथ वाले प्लास्टिक का फॉर्मूला पहले से सर्टिफाइड होता है जिससे मोबाइल या लैपटॉप कंपनी को फायर सेफ्टी या शॉर्ट-सर्किट टेस्ट जैसे कई सेफ्टी टेस्ट पास करने में आसानी होती है और उन्हें सेफ्टी अप्रूवल भी जल्दी मिल जाता है। इससे डिवाइस को तैयार करने में कंपनी का समय भी बचता है और प्रोडक्शन की स्पीड भी बढ़ती है।
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एक तो ब्लैक और व्हाइट प्लास्टिक दाने अन्य रंगों की तुलना में सस्ते और आसानी से मुहैया हो जाते हैं। दूसरी ओर अगर हर फोन के कलर का अलग चार्जर बनाया जाए, तो कंपनियों को अलग-अलग कलर की डाई इस्तेमाल करनी पड़ेगी और मशीनों को बार-बार साफ करना पड़ेगा, जिससे प्रोडक्शन की कॉस्ट भी बढ़ जाएगी।
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ब्लैक या व्हाइट चार्जर बनाना फोन या लैपटॉप कंपनियों के लिए सस्ता और आसान तरीका है। अगर वो डिवाइस कलर के हिसाब से चार्जर बनाने लगी तो मार्केट में चार्जर को लेकर भी भारी कंफ्यूजन फैल सकता है। वहीं अगर यूजर का चार्जर खराब हो जाता है तो उसे भी मैचिंग कलर चार्जर ढूंढने में परेशानी हो सकती है। लेकिन ब्लैक या व्हाइट चार्जर की स्थिति में ऐसा नहीं हो पाता है।