अहमदाबाद में 12 जून को हुए एयर इंडिया विमान हादसे में अपने परिवार के तीन 3 सदस्यों को खो चुके गुजरात के एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसने अहमदाबाद के शवगृह में विमान के कैप्टन सुमित सभरवाल का शव देखा था और वह बैठी अवस्था में विमान का स्टीयरिंग पकड़े हुई हालत में था।
रोमन वोहरा ने मॉर्चरी के अंदर के दृश्यों का किया जिक्र
इस प्लेन क्रैश में अपने भाई परवेज, भाभी यास्मीन और 3 साल की भतीजी को खोने वाले रोमन वोहरा ने मॉर्चरी के अंदर देखे गए दृश्यों का जिक्र किया। वोहरा के ये दावे उस समय सामने आए हैं, जब प्लेन क्रैश के कारणों और उड़ान के अंतिम क्षणों में कॉकपिट में हुई गतिविधियों को लेकर चर्चा जारी है। उनके दावों को आधार बनाते हुए अमेरिका की एक लॉ फर्म के अधिकारी ने कहा कि इस ट्रेजडी के लिए किसी 'एक व्यक्ति' को जिम्मेदार ठहराने से पहले प्लेन क्रैश की जांच ''वास्तव में स्वतंत्र विशेषज्ञों'' से कराई जानी चाहिए। वह अपने आप को हादसे के 100 से अधिक पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधि बताते हैं। उन्होंने कहा, ''परिवारों को सच्चाई जानने का अधिकार है, न कि जल्दबाजी में निकाला गया ऐसा निष्कर्ष जो शक्तिशाली कंपनियों या संस्थानों को बचाने वाला हो।''
241 यात्रियों और परिसर में मौजूद 19 लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि लंदन जा रही एयर इंडिया की उड़ान AI-171 सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही क्षण बाद 12 जून को अहमदाबाद के मेघाणीनगर इलाके में एक हॉस्टल परिसर की इमारत से टकरा गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और परिसर के आसपास मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी। केवल एक यात्री जीवित बचा था। विमान का संचालन पायलट कैप्टन सुमित सभरवाल और सह-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर कर रहे थे।
इस हादसे में अपने भाई, भतीजी और एक रिश्तेदार को खोने वाले रोमन वोहरा ने दावा किया कि वह 13 जून को अपने परिजनों के शवों की तलाश में मॉर्चरी के अंदर गए थे और वहीं उन्होंने कैप्टन सभरवाल का शव देखा था।
'बैठी हुई मुद्रा में था कैप्टन सुमित का शव'
पेशे से लैब तकनीशियन वोहरा ने कहा कि उन्हें अंदर जाने की अनुमति इसलिए मिली क्योंकि वह मेडिकल फील्ड से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, ''मेरे भाई, भाई की बेटी और मेरी रिश्तेदार की इस हादसे में मौत हो गई थी। हादसे के एक दिन बाद मैं उनकी पहचान करने गया था। चूंकि मैं मेडिकल क्षेत्र से हूं और कुछ लोगों से संपर्क भी है इसलिए मुझे मॉर्चरी के अंदर जाने की अनुमति मिल गई।'' वोहरा ने कहा कि कैप्टन सभरवाल का शव अन्य शवों से अलग एक मेज के किनारे रखा गया था। उन्होंने दावा किया, ''उस समय शव अकड़ा हुआ था और बैठी हुई मुद्रा में था, मानो वह अब भी अपनी सीट पर बैठे हों।''
'स्टीयरिंग पर थे हाथ'
वोहरा ने बताया, ''उनके हाथ स्टीयरिंग पकड़े हुए थे। उनके पैर उसी तरह मुड़े हुए थे जैसे बैठे हुए व्यक्ति के होते हैं।'' जब उनसे पूछा गया कि क्या नियंत्रण यंत्र तब भी पायलट के हाथ में था, तो उन्होंने जवाब दिया, ''हां, स्टीयरिंग उनके हाथों में था।'' वोहरा ने यह भी दावा किया कि कैप्टन अपनी वर्दी में थे, जिससे उन्हें शव की पहचान हुई। कैप्टन ने वर्दी पहनी हुई थी। वहां केवल एक कैप्टन का शव था, जो सुमित सभरवाल सर का था। मैंने वर्दी से उन्हें पहचान लिया।''
'शव के सामने वाले हिस्से पर कम जलने के निशान थे'
वोहरा के अनुसार शव के सामने वाले हिस्से पर अपेक्षाकृत कम जलने के निशान थे। उन्होंने कहा, ''वह पीछे की तरफ ज्यादा जले हुए थे। सामने का हिस्सा और चेहरा उतना नहीं जला था। मुझे हर बात ठीक-ठीक याद नहीं है, लेकिन साफ पता चल रहा था कि वह कैप्टन का शव था।'' वोहरा ने कहा कि बाद में पायलट की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरें देखने के बाद पहचान की पुष्टि हुई।
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