सिगरेट न केवल फेफड़ों बल्कि ये आपके शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। सिगरेट या तंबाकू में मौजूद हानिकारक केमिकल्स फेफड़ों की सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर का कारण बनते हैं। लेकिन सिगरेट के धुएं का आखिरी कश छोड़ने के साथ ही शरीर के भीतर एक ऐसी 'मरम्मत' शुरू हो जाती है, जिसकी कल्पना भी शायद एक चेन-स्मोकर ने न की हो। सिगरेट छोड़ना एक बेहतरीन फैसला हो सकता है, क्योंकि यह फेफड़ों को स्वस्थ बनाने का काम करता है। लेकिन सवाल वही है क्या फेफड़े कभी पूरी तरह पहले जैसे हो पाते हैं? और इस रिकवरी में कितना वक्त लगता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, फेफड़ों की सफाई की प्रक्रिया सिर्फ 20 मिनट के अंदर ही शुरू हो जाती है, लेकिन इसे पूरी तरह ठीक होने में महीनों और सालों का वक्त लग सकता है। चलिए जानते हैं।
रिकवरी का टाइमलाइन: पहले घंटे से 15 साल तक
1. शुरुआती 24 घंटे
धूम्रपान छोड़ने के मात्र 20 मिनट बाद हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगता है। 12 से 24 घंटों के भीतर खून में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर गिरकर सामान्य हो जाता है, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन का फ्लो बेहतर हो जाता है।
2. 2 से 4 सप्ताह
फेफड़ों के भीतर 'सिलिया' नामक छोटे बाल होते हैं, जो धुएं के कारण पैरालाइज्ड हो जाते हैं। स्मोकिंग छोड़ने के कुछ हफ्तों बाद ये सिलिया फिर से सक्रिय हो जाते हैं। वे फेफड़ों से बलगम और गंदगी को बाहर निकालना शुरू करते हैं। यही कारण है कि स्मोकिंग छोड़ने के शुरुआती दिनों में खांसी बढ़ सकती है यह वास्तव में फेफड़ों की सफाई का संकेत है।
3. 1 से 9 महीने
इस दौरान फेफड़ों की कार्यक्षमता में 10 फीसदी तक का सुधार होता है। सांस फूलने की समस्या कम होने लगती है और बार-बार होने वाले 'चेस्ट इन्फेक्शन' में कमी आती है।
4. 1 से 10 साल
स्मोकिंग छोड़ने के 1 साल बाद दिल के दौरे का खतरा कम हो जाता है।
10 साल बाद: फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौत का जोखिम लगभग आधा हो जाता है।
क्या फेफड़े 100% पहले जैसे हो जाते हैं?
यह एक कड़वा सच है कि फेफड़े लीवर की तरह पूरी तरह से री-जेनरेट नहीं हो सकते। फेफड़ों के ऊतकों में अगर स्कारिंग या 'एम्फिसीमा' जैसी स्थिति पैदा हो चुकी है, तो वह स्थायी होती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 'इन्फ्लेमेशन'पूरी तरह खत्म हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति सीओपीडी जैसी गंभीर स्थिति से पहले स्मोकिंग छोड़ देता है, तो उसके फेफड़े काफी हद तक स्वस्थ व्यक्ति की तरह काम करने लगते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।