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फलों के ऊपर क्यों लगाए जाते हैं स्टिकर? 99% लोगों नहीं जानते इसका मतलब, जान लें इस कोड का सेहत से क्या है कनेक्शन?

 Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
 Published : Oct 22, 2025 03:08 pm IST,  Updated : Oct 22, 2025 03:08 pm IST

फलों पर लगाए जाने वाले ये स्टिकर केवल सजावट के लिए नहीं होते है। इसका सीधा संबंध आपकी सेहत से है चलिए जानते हैं कैसे?

फ्रूट पर स्टीकर का मतलब- India TV Hindi
फ्रूट पर स्टीकर का मतलब Image Source : YOUTUBE

फल खरीदते समय अक्सर आपने देखा होआ कि उस पर छोटे छोटे कोड वाले स्टिकर चिपके होते हैं। बता दें, फलों पर लगाए जाने वाले ये छोटे स्टिकर केवल ब्रांडिंग या सजावट के लिए नहीं होते है। इन स्टिकरों पर एक विशेष कोड अंकित होता है, जिसे पीएलयू कोड (PLU Code) कहा जाता है। ये कोड ग्राहक को फल को उगाए जाने के तरीके के बारे में बताते हैं, जिसका सीधा संबंध आपकी सेहत से है। इन कोड से आप फलों की गुणवत्ता कैसी है इसकी पहचान कर सकते हैं। बेहतरीन गुणवत्ता वाले फलों का सेवन करने से सेहत भी अच्छी होती है। तो चलिए जानते हैं क्या है फलों पर लगे कोड का मतलब?

पीएलयू कोड का सेहत से क्या है कनेक्शन?

पीएलयू कोड आमतौर पर 4 या 5 अंकों का होता है, और इसकी शुरुआत का अंक ही यह तय करता है कि फल को किस तरह से उगाया गया है। इन कोड्स को पढ़कर आप जान सकते हैं कि फल ऑर्गेनिक है, रसायन युक्त है या आनुवांशिक रूप से संशोधित है।

क्या है फलों पर लगे कोड का मतलब?

  • 5 अंकों 9 से शुरू: अगर फलों पर लगे स्टिकर पर 5 अंकों की संख्या है और यह '9' से शुरू हो रही है, तो इसका मतलब है कि यह फल पूरी तरह से ऑर्गैनिक है। इसे बिना किसी रासायनिक कीटनाशक, उर्वरक या आनुवांशिक बदलाव के प्राकृतिक तरीके से उगाया गया है।

  • 4 अंक: अगर, स्टिकर पर केवल 4 अंकों की संख्या है, तो इसका मतलब है कि फल में कीटनाशक और रसायनों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे फल अक्सर सस्ते होते हैं, लेकिन रसायनों से पकाए जाने की वजह से सेहत के लिए कम फायदेमंद होते हैं। 

फल खरीदते समय बरतें ये सावधानी: 

अब, जबकि आपको फलों पर लगे इस कोड की जानकारी हो गई है तो आप उसे खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें। जहां तक हो 5सके  अंकों की '9' से शुरू होने वाले ऑर्गेनिक फलों को ही खरीदें। खरीदे हुए फल चाहे ऑर्गेनिक हो या रासयनिक, खाने से पहले उसे अच्छी तरह से धोना बेहद ज़रूरी है ताकि उसकी सतह पर मौजूद बैक्टीरिया को हटाया जा सके। साथ ही मौसमी फलों को ही खरीदने का प्रयास करें क्योंकि वे ताज़े होते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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