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'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाएगा 14 अगस्त, PM बोले- बंटवारे के दर्द को नहीं भुलाया जा सकता

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 14, 2021 10:54 am IST,  Updated : Aug 14, 2021 11:26 am IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि #PartitionHorrorsRemembranceDay का यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।

14 August Partition Horrors Remembrance Day Partition’s pains can never be forgotten says PM Narendr- India TV Hindi
'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाएगा 14 अगस्त, PM बोले- बंटवारे के दर्द को नह Image Source : PTI

नई दिल्ली. कल भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ है। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जानकारी दी है कि 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी ने ट्वीट कर कहा कि देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले ट्वीट में कहा कि #PartitionHorrorsRemembranceDay का यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।

14 अगस्त 1947 को छलनी हुआ भारत माता की सीना

देश के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह दिन था जब देश का विभाजन हुआ और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान तथा 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। इस विभाजन में न केवल भारतीय उप-महाद्वीप के दो टुकड़े किये गये बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया और बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया, जो 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना।

कहने को तो यह एक देश का बंटवारा था, लेकिन दरअसल यह दिलों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा था। भारत मां के सीने पर बंटवारे का यह जख्म सदियों तक रिसता रहेगा और आने वाली नस्लें तारीख के इस सबसे दर्दनाक और रक्तरंजित दिन की टीस महसूस करती रहेंगी।

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