जयपुर: जयपुर की एक अदालत ने अजमेर शरीफ दरगाह में 2007 में हुए बम विस्फोट के दोनों दोषियों को बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने आठ मार्च को भवेश पटेल, देवेंद्र गुप्ता और सुनील जोशी को दोषी करार दिया था। सुनील जोशी की पहले ही मौत हो चुकी है। सजा की मियाद पर बहस 18 मार्च को पूरी हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने बुधवार को गुप्ता और पटेल को उम्रकैद की सजा सुनाई।
असीमानंद पर हमले की योजना बनाने का आरोप था। 11 अक्टूबर 2007 को हुए इस ब्लास्ट में तीन लोगों की मौत हो गई थी और करीब 20 लोग घायल हुए थे। बचाव पक्ष के वकील जगदीश एस राणा ने बताया था कि अदालत ने स्वामी असीमानंद समेत सात लोगों को सन्देह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। दोषी पाए गए अभियुक्तों में से सुनील जोशी की मृत्यु हो चुकी है।
उन्होंने बताया था कि अदालत ने स्वामी असीमानंद, हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, मेहुल कुमार, भरत भाई को सन्देह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। उन्होंने बताया था कि न्यायालय ने देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 195 और धारा 295 के अलावा विस्फोटक सामग्री कानून की धारा 3(4) और गैर कानूनी गतिविधियों का दोषी पाया।
असीमानंद कई अन्य बम ब्लास्ट के मामले में भी आरोपी हैं जिसमें हैदराबाद की मक्का मस्जिद में 2007 में ब्लास्ट और उसी वर्ष समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट शामिल है जिसमें लगभग 70 लोगों की मौत हो गई थी। समझौता एक्सप्रेस भारत-पाकिस्तान के बीच चलती है।
उन्हें 2010 में जेल भेजा गया जहां उन्होंने आतंकी मामलों में कथित तौर पर अपनी भूमिका को स्वीकार किया था। बाद में उन्होंने कहा कि जांच अधिकारियों ने उन्हें प्रताड़ित करके झूठा बयान दिलाया था।