
विपक्ष की सहमति के लिए मानीं दो शर्तें:
विधेयक पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की सहमति हासिल करने के लिए सरकार को कांग्रेस की दो शर्ते माननी पड़ीं-
- एक प्रतिशत का अतिरिक्त कर हटाना पड़ा
- विवाद निवारण प्रणाली को शक्तिशाली बनाना
सरकार ने क्या नहीं माना:
हालांकि जीएसटी विधेयक में ही जीएसटी कर की दर को निर्धारित करने की मांग स्वीकार नहीं की गई। जीएसटी दर निर्धारण पर जेटली ने कहा कि इसका निर्धारण जीएसटी परिषद करेगी, जिसमें केंद्र और सभी राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने कहा, "हमें जनता के प्रति राज्यों की जिम्मेदारी पर विश्वास करना चाहिए।"
अब तक क्यों अटका रहा GST :
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस बिल के लिए पहल की थी, लेकिन तब बहुमत न होने और विपक्ष के विरोध के कारण इस पर कुछ नहीं हो सका। साल 2009 में जब यूपीए की सरकार आई तो उसने भी इसे पास कराने की कोशिश की, लेकिन तब ज्यादातर राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें होने की वजह से इसे कामयाबी नहीं मिल सकी थी।
GST का प्रस्ताव पहली बार कब सामने आया:
जीएसटी विधेयक का प्रस्ताव पहली बार 2003 में सामने आया, हालांकि उसके सात साल बाद पहली बार औपचारिक तौर पर इसे संसद में पेश किया गया। लोकसभा चुनाव-2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद इस विधेयक को बड़े संशोधन के साथ 19 दिसंबर, 2014 को लोकसभा में पेश किया गया। लोकसभा में जीएसटी विधेयक छह मई, 2015 को पारित हुआ। इसके बाद विधेयक को राज्य सभा की प्रवर समिति के पास समीक्षा के लिए भेजा गया, जिसने 22 जुलाई, 2015 को अपनी रिपोर्ट दी।
विधेयक पर चर्चा के दौरान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा राज्यों के अधिकार की रक्षा की मांग की। उन्होंने कहा, "24 फीसदी का जीएसटी देश की अधिकांश जनता की कमर तोड़ देगा। विवाद निवारण के लिए व्यापक विचार की जरूरत है और विवाद निवारण प्रणाली को बहुत ही स्पष्ट बनाना होगा।"येचुरी ने कहा, "क्या हम चाहते हैं कि केंद्र के पास राज्य भीख का कटोरा लेकर जाएं। देश का संघीय ढांटा खत्म नहीं होना चाहिए। हमारे संविधान की संप्रभुता लोग हैं।"
इस पर जेटली ने कहा, "भारत राज्यों का कोई संगठन नहीं है बल्कि राज्यों का संघ है। जीएसटी के लिए राज्य अपनी शक्तियां नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि वे अधिकारों के इस्तेमाल का हिस्सा बनने जा रहे हैं। केंद्र और राज्य एकसाथ बैठेंगे और दोनों के लिए एक जैसा कर ढांचा होगा।"