मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य विधानसभा को आज सूचित किया कि महाराष्ट्र सरकार के समक्ष अलग विदर्भ राज्य के निर्माण का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। फडणवीस ने कहा, इस तरह का (अलग विदर्भ राज्य के लिए) कोई प्रस्ताव नहीं है। छोटे राज्यों के निर्माण के विषय को केंद्र देखता है। निचले सदन के अंदर और बाहर विपक्ष के शोर शराबे और विरोध प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री ने अलग विदर्भ राज्य के गठन के इस विवादास्पद मुद्दे पर ये बातें कहीं।
बहरहाल, इस तरह के किसी भी कदम की मुखर विरोधी रही भाजपा की सहयोगी शिवसेना भी अलग विदर्भ राज्य के गठन का समर्थन करने वालों की आलोचना में शामिल हो गई। शिवसेना विधायक प्रकाश अबितकर ने फडणवीस से अलग विदर्भ राज्य के निर्माण पर रूख स्पष्ट करने को कहा। विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने आरोप लगाया कि विदर्भ के मुद्दे पर शिवसेना और भाजपा के बीच गठजोड़ है। अलग विदर्भ राज्य के मुद्दे पर विपक्षी विधायकों के शोर शराबे के बाद विधानसभा दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को भी सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी।
शिवसेना विधायकों ने अलग विदर्भ राज्य के गठन का विरोध करते हुए विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। शिवसेना विधायकों ने विधान भवन के मुख्य प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर महाराष्ट्र एकीकृत बना रहे के नारे लगाए। उन्होंने एक तख्ती ले रखी थी जिस पर भाजपा सांसद नाना पटोले को शेखचिल्ली के तौर पर पेश किया गया था। पटोले ने पिछले सप्ताह लोकसभा में विदर्भ राज्य के गठन की मांग को लेकर प्रस्ताव पेश किया था।
विखे पाटिल ने बताया कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में 105 शहीदों के बलिदान के बाद महाराष्ट्र का गठन हुआ था। कांग्रेस नेता ने कहा, अलग विदर्भ के निर्माण और इस मांग का समर्थन कर भाजपा ने महाराष्ट्र के लोगों का अपमान किया है। इससे पहले दिन में विधानसभा में अलग विदर्भ का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस-राकांपा विधायक विधानसभा अध्यक्ष के आसन के समक्ष आ गए और एकीकृत महाराष्ट्र के लिए नारे लगाने लगे।