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सिंघू बॉर्डर से टेंट छोड़कर घर लौट रहे हैं किसान, गाजीपुर बॉर्डर का मंच बना सियासत का अखाड़ा

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुए उपद्रव और हिंसा की घटनाओं के बाद किसान आंदोलन की तस्वीर हर दिन के साथ बदल रही है, इसके साथ ही इस आंदोलन के समीकरण भी बदल रहे हैं ।

Vijai Laxmi Vijai Laxmi @vijai_laxmi
Updated on: January 30, 2021 11:52 IST
सिंघु बॉर्डर पर टेंट छोड़कर घर लौट रहे हैं किसान, गाजीपुर बॉर्डर का मंच बना सियासत का अखाड़ा- India TV Hindi
Image Source : PTI सिंघु बॉर्डर पर टेंट छोड़कर घर लौट रहे हैं किसान, गाजीपुर बॉर्डर का मंच बना सियासत का अखाड़ा

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुए उपद्रव और हिंसा की घटनाओं के बाद किसान आंदोलन की तस्वीर हर दिन के साथ बदल रही है, इसके साथ ही इस आंदोलन के समीकरण भी बदल रहे हैं । सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर किसान टेंट छोड़कर घर लौट रहे हैं वहीं गाजीपुर बॉर्डर सियासत का अखाड़ा बनता जा रहा हैं। यहां पर राकेश टिकैत बैठे हैं और उनके रोने के बाद बदले माहौल में वहां सियासी दलों के नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। एक-एक कर विभिन्न दलों के नेताओं का पहुंचना जारी है। सिंघू बॉर्डर की सूरत भी बिल्कुल बदली-बदली सी है। जहां हजारों की संख्या में किसान टेंट लगाकर बैठे थे । अब वहां भीड़ कम हो रही है और कई टेंट खाली हैं। लोग अपने गांवों को लौट रहे हैं। 

वहीं इस आंदोलन में अब पॉलिटिकल पर्यटन शुरू हो गया है। किसानों को दोबारा इस आंदोलन में खींचने के लिए कई तरह के फॉर्मूले अपनाए जा रहे हैं।दिल्ली बॉर्डर से किसानों के जाने के बाद जो लंगर बंद हो गए थे वो फिर से चालू हो गए हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि पहले आंदोलन में सिर्फ किसान थे लेकिन गाजीपुर बॉर्डर के मंच का पॉलिटिकल हाईजैक हो चुका है। पहले किसान कह रहे थे कि किसी भी हाल में नेताओं के आंदोलन में शामिल नहीं होने देंगे। वहां अब नेताओं का स्वागत किया जा रहा है। कल दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से लेकर जयंत चौधरी तक आए थे.। अब अभय चौटाला, दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष समेत कई नेता पहुंचने वाले हैं। 

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सद्भावना दिवस मना रहे हैं किसान

नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सद्भावना दिवस मना रहे हैं और दिन भर का उपवास रखेंगे। किसान नेता सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक उपवास रखेंगे। उन्होंने देश के लोगों से किसानों के साथ जुड़ने की अपील की। किसान नेताओं ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि कृषि कानूनों के खिलाफ "शांतिपूर्ण" आंदोलन को "बर्बाद" करने का प्रयास किया जा रहा है। 

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