नई दिल्ली: भारत में पहली बार नागपुर में एक अद्भुत हार्लेक्विन बेबी ने जन्म लिया। लेकिन डॉक्टर इसे नहीं बचा सके। जिसके कारण 48 घंटे बाद इस बच्ची की मौत हो गई। दो दिन पहले महाराष्ट्र के अमरावती में रहने वाली 23 साल की महिला ने नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में देर रात 12 बजकर 45 मिनट में एक बच्ची को जन्म दिया। जिसे देखकर डॉक्टर्स भी हैरीन थे।
ये भी पढ़े-
- दिखे ये 7 लक्षण, तो समझों आपको है अपेंडिक्स
- पाना है पेट की चर्बी से निजात, तो करें इस ड्रिंक का सेवन
- तीन गुना तेजी से कम करना है मोटापा, तो रोज करें इसका सेवन
जन्म लेने वाली बच्ची आम बच्चों की तरह ना होकर काफी अलग थी। जिसके शरीर में स्किन नहीं थी। साथ ही आंखे और मुंह भी अलग था। इस बच्ची को एक ऐसी बीमारी थी। जिसमें बच्चे के शरीर की बाहरी स्किन विकसित नहीं होती। जिसके कारण शरीर की इंटरनल ऑर्गन्स साफ-साफ नजर आता है। साथ ही इनकी स्किन सफेद मोटे प्लेटों में गहरी दरारों में बंट गई है। डॉक्टरों के अनुसार इस तरह के मामले काफी कम देखने में आते हैं। इन बच्चों की स्कीन इलाज से भी ठीक नहीं की जा सकती।
विश्व में केवल ऐसे 12 मामले सामने आए
इस अद्भुत तरीके के शरीर वाली बच्ची का जन्म नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में हुआ। इस अस्पताल की डीन डॉ. काजल मित्रा ने बताया कि इस बच्ची को जन्म लेते समय ही सांस लेने में समस्या हो रही थ। जिसके कारण उसे वेंटीलेटर में रखा गया। यह बच्ची रेयन बार्न ड़िसीज हार्लेक्विन एचथियोसिस से पीडित थी।
ऐसे पहला पहला मामला अमरिका के साउथ कैरोलीना में अप्रैल 1750 में जन्मा था। तब से लेकर अभी तक विश्व में 12 ऐसे मामले सामने आ चुके है। भारत के अलावा ऐसी बेबी जर्मनी, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में एक महिला ने ऐसा बेबी को जन्म दिया था।
अगली स्लाइड में पढ़े और