
ग्राफिक्स डिजाइनर था कातिल
21 साल का ग्राफिक्स डिजाइनर चक्करघिन्नी की तरह पुलिसवालों को इधर से उधर घूमा रहा था। यकीन नहीं होता कत्ल जैसे संगीन जुर्म को अंजाम देने के बाद भी वो पुलिसवालों की आंखों के सामने था। एक तरफ अजय जांच टीम को गुमराह कर रहा था। जय के घरवालों के जज्बात से खेल रहा था तो दूसरी तरफ रोज जय के शव को देखने भी जाया करता था। आखिर दोस्त के शव को देखने क्यों जाता था अजय। क्या वो शव को कहीं और ठिकाने लगाना चाहता था। या फिर इस साजिश का सच कुछ और था।
कॉल डिटेल से पुलिस के हाथ लगा बड़ा सबूत
तमाम कोशिशों के बाद पुलिस ने जय के मोबाइल नंबर पर फोकस किया.पहले कॉल डिटेल निकाली गई और फिर उसकी लोकेशन को खंगाला जाने लगा। कॉल डिटेल से पता चला कि गायब होने से पहले वो दोस्त अजय के संपर्क में था, लेकिन एक और नंबर भी था। जिसपर बीते तीस दिनों से जय लगातार बातचीत कर रहा था। चौकाने वाली बात ये थी कि दोनों नंबरों के बीच व्हाट्सअप
और sms के जरिए खूब चैटिंग होती थी।
टेक्निकल टीम की मदद से एक बड़ा ब्रेक थ्रू पुलिस के हाथ लगा। ये ब्रेक थ्रू था जय का एक लड़की के साथ अफेयर का। तो क्या हत्या के पीछे कोई लड़की थी। क्या गर्लफ्रेंड की वजह से एक दोस्त ने दोस्त की हत्या कर दी थी? क्या पुलिस इस केस को सॉल्व करने के एकदम करीब पहुंच चुकी थी या फिर ये भी एक ट्रैप था
जांच टीम के लिए किसी पेशेवर मुजरिमों के दिमाग को पढ़ना आसान था, लेकिन ग्राफिक्स डिजाइनर अजय की साजिशों से पार पाना बेहद मुश्किल था। ये केस उस वक्त और उलझ गया जब कहानी में एक लड़की की एंट्री हुई। पुलिस ने जांच की दिशा उस लड़की की तरफ केंद्रित कर दी। लेकिन मामले पर मिस्ट्री की कई परतें चढ़ चुकी थी।
किडनैपर्स घरवालों को यकीन दिलाने में कामयाब रहे है कि अपरहण के पीछे नैंसी नाम की एक लड़की है। मामला जय की जिंदगी का था। लिहाजा घरवाले फिरौती की रकम देने को तैयार हो गए। सौदा 11 लाख में तय हुआ, लेकिन किडनैपर्स फिरौती की रकम लेने की बजाय घरवालों को एक जगह से दूसरी जगह पर घूमाते रहे।
घरवालों की उम्मीदें बार-बार टूट रही थी। जांच टीम भी किडनैपिंग का मामला दर्ज कर जय को सही-सलामत रिहा कराने में जुटी हुई थी। कॉल डिटेल की मदद से नैंसी की डिटेल जैसे ही खंगाली गई। इस ब्लाइंड केस में सबूतों की रौशनी में एक सुराग नजर आ गया। पता चला कि जिस मोबाइल सेट का इस्तेमाल नैंसी कर रही थी। वो मोबाइल जय के दोस्त अजय का था।
एक सबूत कि बिनाह पर कातिल दोस्त अजय जांच के घेरे में आ गया। अभी तक उसपर शक करने की कोई वजह नहीं थी, लेकिन इसका तोड़ भी अजय के शातिर दिमाग में पहले ही सोच रखा था। पुलिस को चकमा देने के लिए अजय अपहरण की कहानी गढ़ डाली-
अजय का शातिर दिमाग पुलिस की सोच से कई कदम आगे की साजिशें रच रहा था। जुर्म पर पर्दा डालने के लिए अजय जांच टीम को चकमा देने के लिए अपने साथ उस जगह पर ले गया। जहां पर अपहरण होने की कहानी वो सुना रहा था। अजय की चाल में मानों पुलिस पूरी तरह फंस चुकी थी।
ऐसे हुआ पुलिस को जय पर शक
जय मामले को नैंसी नाम की उस लड़की की मिस्ट्री ने चारों तरफ से घेर लिया। हर नए दिन के साथ नवघर पुलिस स्टेशन की टीम नए सवालों से जूझ रही थी। कातिल दोस्त पुलिस की हिरासत में पहुंच चुका था। एक अहम सबूत भी था, लेकिन कड़ी पूछताछ के बाद भी वो नहीं टूटा।
कई घंटों की पूछताछ का नतीजा ये हुआ कि दोस्त अजय शक के घेरे में आ चुका था। लेकिन पुख्ती सबूतों के बिना कातिल अजय की शिकंजा नहीं कसा जा सकता था। सबूतों की मदद से जांच टीम ने अजय को घेरने का फैसला किया। पुलिस अब अजय की सोच को मात देने चाहती थी। अजय ने बताया था कि देर रात जय के बुलाने पर वो लोकल ट्रेन से नवघर पहुंचा था और ट्रेन से ही वापस लौटा था।पुलिस ने रेलवे स्टेशन और पूरे इलाके की सीसीटीवी खंगालना शुरू कर दिया।
अंधेरे में चलाया गया तीर एकदम सही निशाने पर लगा। सीसीटीवी में अजय अकेला नहीं था उसके साथ एक और शख्स भी था। पूछताछ के दौरान अजय ने इस बात का खुलासा नहीं किया था। बस फिर क्या था। दो सबूत जांच टीम के हाथ लग गए। इस बार जांच टीम इन सबूतों की मदद से अजय का सच से सामना करवाया।
आखिरकार अजय ने दोस्त जय के कत्ल का गुनाह कबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि एक लड़की और दोस्त की मदद से हत्या को अंजाम दिया था। किडनैपिंग का केस अब कत्ल में बदल चुका था। किसी के लिए यकीन करना मुश्किल था कि एक जिगरी दोस्त ने ही जय को मौत के घाट उतारा था। कातिल दोस्ती की निशानदेही पर जांच टीम ने जय का शव बरामद कर लिया
कत्ल की गुत्थी सुलझ गई, लेकिन जय की हत्या के पीछे का सच क्या था। क्यों नैंसी नाम की लड़की को मोहरा बनाकर अजय ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। आखिर कई परतों में लिपटी इस साजिश का पूरा सच क्या है। क्या है कत्ल से जुड़ी एक थप्पड की वो कहानी।
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