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बुजुर्ग महिला के बचाव में आई अदालत, बेटे-बहू को घर खाली करने का आदेश

Bhasha Published : Jan 30, 2017 04:52 pm IST, Updated : Jan 30, 2017 04:52 pm IST

दिल्ली की एक कोर्ट ने सोमवार को 74 वर्षीय विधवा की मदद के लिए सामने आते हुए उसके बेटे और बहू को घर खाली करने का आदेश दिया। बुजुर्ग महिला के बेटे और बहू उन्हें प्रताड़ित किया करते थे।

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नई दिल्ली: दिल्ली की एक कोर्ट ने सोमवार को 74 वर्षीय विधवा की मदद के लिए सामने आते हुए उसके बेटे और बहू को घर खाली करने का आदेश दिया। बुजुर्ग महिला के बेटे और बहू उन्हें प्रताड़ित किया करते थे। साथ ही अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा और दहेज के कानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग बुजुर्ग अभिभावकों का मुंह बंद करने के लिए किया जाता है। 

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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कामिनी लाउ ने अपने फैसले में कहा, ‘जिंदगी कोई सीढ़ी नहीं बल्कि एक पूर्ण चक्र है। कानून बुजुर्ग को आर्थिक और भावनात्मक रूप से अकेला छोड़ने की अनुमति नहीं दे सकता और वह भी तब, जब इस उम्र में उन्हें अपनों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।’ उन्होंने कहा कि न्यायतंत्र बच्चों द्वारा बुजुर्ग अभिभावकों के खिलाफ किए जा रहे अनुचित और गैरकानूनी आचरण को रोकने के लिए जरूर कदम उठाएगा। जज ने कहा, ‘हम भूल जाते हैं कि अगर हम इस उम्र में उनकी देखभाल नहीं करेंगे तो हमारे बच्चे भी हमारी परवाह नहीं करेंगे।’ कोर्ट ने पाया कि मध्य दिल्ली की निवासी शांति देवी 2 संपत्तियों की हकदार है और उन्होंने (कोर्ट ने) उनके बेटा-बहू को घर खाली करने और शांतिपूर्ण तरीके से उसे उन्हें (शांति देवी को) सौंपने का आदेश दिया।

उन्होंने दंपति को अक्टूबर 2015 से लेकर संपति सौंपने तक हर माह के हिसाब से शांति देवी को 5,000 रुपये बतौर हर्जाना देने का आदेश भी दिया। जज ने कहा, ‘बुजुर्ग महिला अपने बेटे और उसकी पत्नी के हाथों उत्पीड़न और अपमान झेल रही थीं। उन्होंने पुलिस से कई शिकायतें की और प्रताड़ना की जानकारी भी दी।’ उन्होंने कहा कि दंपति ऐसा उनकी संपत्ति हड़पने के लिए कर रहा था। उन्होंने कहा कि यह केवल शांति देवी की कहानी नहीं है बल्कि हजारों बुजुर्ग ऐसी ही परेशानियां झेल रहे हैं जिसके बारे में हमें रोजना सुनने को मिलता है। जज ने कहा, ‘अभिभावकों और बुजुर्गों का सम्मान करना और उनकी देखभाल करना हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का हिस्सा है।’

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