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Rajat Sharma's Blog: बिहार में इंसेफेलाइटिस से निपटने के लिए पिछले 20-25 वर्षों से कुछ नहीं किया गया

 Published : Jun 19, 2019 03:47 pm IST,  Updated : Jun 19, 2019 03:47 pm IST

आजादी के 72 साल बाद भी एक बीमारी से इस तरह बच्चों की मौत होना, एक ऐसी त्रासदी है जिसे देखकर दिल दहल उठता है।

India TV Chairman and Editor-in-Chief Rajat Sharma | India TV- India TV Hindi
India TV Chairman and Editor-in-Chief Rajat Sharma | India TV Image Source : INDIA TV

एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) पिछले 20-25 वर्षों से बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में बच्चों की जान लेता रहा है लेकिन मुझे आश्चर्य है कि राज्य प्रशासन और चिकित्सा वर्ग से जुड़े लोगों ने हालात से निपटने के लिए वार्षिक आधार पर खानापूर्ति के सिवा और कुछ नहीं किया। हमारे रिपोर्टर्स का कहना है कि गर्मियों में इस बुखार के चलते लगभग हरेक साल बच्चों की मौत होती रही है। इस बीमारी के फैलने पर स्थानीय प्रशासन मानसून की बारिश का इंतजार करता है ताकि गर्मी कम हो और ये बीमारी खुद-ब-खुद खत्म हो जाए। इस बीमारी को हर साल सामान्य तौर पर लिया जाता था लेकिन इस साल टीवी चैनलों ने इससे जुड़ी खबर को व्यापक स्तर पर चलाया। इससे पूरे देश का ध्यान मुजफ्फरपुर की ओर गया जहां इस बुखार से पीड़ित बच्चे तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे थे। 

बिहार के डॉक्टर आज भी यह कह रहे हैं कि उन्हें न तो ये पता है कि यह बीमारी क्यों होती है और न ही ये पता है कि इसका इलाज क्या है, और इसे कैसे रोका जाए। आजादी के 72 साल बाद भी एक बीमारी से इस तरह बच्चों की मौत होना, एक ऐसी त्रासदी है जिसे देखकर दिल दहल उठता है। इंडिया टीवी के रिपोर्टर्स ने पाया कि मुजफ्फरपुर के अस्पताल में बेड, डॉक्टर्स और नर्सों की कमी है। इस बुखार से पीड़ित छोटे बच्चे अस्पताल में फर्श पर बिछाए गद्दों पर सोने के लिए मजबूर हैं। ऐसा नहीं है कि यह अकेले मुजफ्फरपुर का मामला है। मुजफ्फरपुर का यह अस्पताल इस बात एक क्लासिक उदाहरण है कि पूरे बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल है। जरा सोचिए, जिस अस्पताल में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है, वहां बुखार नापने के लिए थर्मामीटर और ओआरएस जैसी बेसिक चीजें नहीं है। साफ-सफाई का बहुत बुरा हाल है। इस अस्पताल में इलाज से ज्यादा मौत का पूरा इंतजाम है।

बिहार के मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मुजफ्फरपुर के अस्पताल का दौरा केवल इसलिए किया क्योंकि टीवी न्यूज चैनल्स पिछले 2-3 दिनों से इस बुखार के चलते बच्चों की मौत की खबरें जोरदार तरीके से दिखा रहे थे। और फिर मुख्यमंत्री के दौरे के बाद जो घोषणाएं हुईं उन्हें सुनकर ये नहीं समझ आता कि इस पर हंसे या रोएं। सरकार ने फैसला किया है कि इस अस्पताल को अपग्रेड कर पच्चीस सौ बेड का बनाया जाएगा और बच्चों के वार्ड्स की संख्या बढ़ाई जाएगी। अस्पताल के पास एक धर्मशाला का निर्माण होगा ताकि मरीजों के रिश्तेदारों के ठहरने का इंतजाम हो सके।

इन सभी घोषणाओं का कोई मतलब नहीं है। वास्तविकता यह है कि डॉक्टर, नौकरशाह और राजनेता बारिश के आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि मौसम बदलते ही इस बीमारी का असर स्वाभाविक रूप से कम हो जाएगा। इससे ये लोग राहत की सांस ले सकेंगे और देश की जनता वक्त बीतने के साथ ही इसे भूल जाएगी। लेकिन मैं अपने दर्शकों से वादा करना चाहता हूं कि इंडिया टीवी इसे भूलने नहीं देगा। हम बिहार सरकार को बार-बार उसकी जिम्मेदारियों की याद दिलाते रहेंगे ताकि अगले साल गर्मी के  मौसम में बच्चों की ऐसी दर्दनाक मौत न हो। (रजत शर्मा)

देखें, 'आज की बात, रजत शर्मा के साथ', 18 जून 2019 का पूरा एपिसोड

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