नयी दिल्ली: आतंकवादी बुरहान वानी प्रकरण की पृष्ठभूमि में भारत ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तान से कहा कि एक देश का आतंकवादी किसी के लिए शहीद या स्वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकता और यह उम्मीद भी जताई कि पड़ोसी देश आपराधिक मामलों पर आपसी सहयोग के बारे में दक्षेस संधि की अभिपुष्टि करेगा एवं दक्षेस आतंकवाद संबधी अपराध निगरानी डेस्क की स्थापना करेगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दक्षेस देशों के गृह मंत्रियों की सातवीं बैठक के लिए अपने पाकिस्तान दौरे के बाद आज राज्यसभा तथा लोकसभा में दिये बयान में कहा कि उन्होंने दक्षेस के सदस्य देशों से अनुरोध किया है कि आतंकवाद को महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए और इसे संरक्षण देना बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा एक देश का आतंकवादी दूसरे के लिए शहीद या स्वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकता।
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सिंह ने कहा आतंकवाद को बढ़ावा या समर्थन देने वाली सरकार और सरकार से इतर सभी पक्षों के विरूद्ध प्रभावी कदम उठाये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद में सम्मिलित व्यक्तियों के विरूद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए तथा उनका प्रत्यर्पण सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि वे कानून से बच नहीं पाएं। गौरतलब है कि लश्कर ए तैयबा के हाफिज सईद और जैश ए मोहम्मद के मसूद अजहर सहित पाक स्थित कई आतंकवादी भारत में वांछित हैं। पाकिस्तान ने सुरक्षा बलों के हाथों हिजबुल के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के विरोध में एक बयान दिया था जिसमे उसने वानी को शहीद और स्वतंत्रता सेनानी कहा था। भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी।
गृह मंत्री ने कहा, आतंकवाद को बढ़ावा नहीं मिले, इस हेतु मैंने कहा कि जरूरी है कि न सिर्फ आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के विरूद्ध बल्कि उन्हें समर्थन देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं, संगठनों और राष्ट्रों के विरूद्ध भी कठोर से कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। आतंकवाद की हैवानियत से तभी निबटा जा सकता है। उन्होंने कहा, जहां तक हमारे पड़ोसी पाकिस्तान का सवाल है मैं बताना चाहूंगा कि आपराधिक मामलों पर आपसी सहायता के लिए दक्षेस सम्मेलन को उसने अभी तक अनुमोदित नहीं किया है। एसटीओएमडी एवं एसडीओएमडी हेतु भी उनकी सहमति अभी शेष है। पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि वे इस ओर शीघ्र कार्रवाई करेंगे और मैं आशा करता हूं कि यह शीघ्र वास्तव में शीघ्र होगा।
सिंह ने यह भी कहा कि आपराधिक मामलों पर आपसी सहयोग के बारे में दक्षेस समझौते को उन देशों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए कि जिन्होंने अभी तक इसका अनुमोदन नहीं किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि दक्षेस आतंकवादी अपराध निगरानी डेस्क :एसटीओएमडी: और दक्षेस मादक पदार्थ अपराध निगरानी डेस्क :एसडीओएमडी: को उन देशों की सहमति की आवश्यकता है जिन्होंने अभी तक इस पर सहमति नहीं दी है। गृह मंत्री ने कहा अच्छे और बुरे आतंकवाद में भेद करने की भूल नहीं की जाए। राज्यसभा में सदस्यों द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरणों के जवाब में सिंह ने कहा आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर सदस्यों ने जिस तरह एकजुटता दिखाई है उससे न केवल सदन की बल्कि देश की एकता भी जाहिर होती है।
राजनाथ सिंह ने कहा मुझे पूरा विश्वास है कि देश में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे आतंकवाद का हम जड़ से सफाया करने में सफल होंगे। गृह मंत्री ने कहा कि दक्षेस बैठक के एजेंडा में आतंकवाद, मादक पदाथो की तस्करी, मानव तस्करी और साइबर अपराध प्रमुख थे। ज्यादातर प्रतिभागी देशों ने अपने अपने घोषणापत्रों में आतंकवाद की निंदा की। सिंह ने कहा, भारत की ओर से मैंने आतंकवाद पर विशेष बल दिया, मुझे विश्वास है कि सदन के सभी सदस्य इस बात पर सहमत होंगे क्योंकि दक्षिण एशिया में शांति और खुशहाली के लिए सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ा खतरा भी आतंकवाद है। मैंने इस बुराई को जड़ सहित उखाड़ फेंकने का पक्का संकल्प करने का आवान किया।
उन्होंने कहा, दक्षिण एशिया क्षेत्र समेत पूरी दुनिया में आतंकवाद के गहरे बादल मंडरा रहे हैं। पूरा विश्व समुदाय इस गंभीर खतरे से बेहद चिंतित है, ऐसा सर्वविदित है। यह इस बात से भी स्पष्ट है कि इस मानवता विरोधी खतरे पर अपना स्पष्ट संदेश तो दिया ही साथ में लगभग सभी सदस्य देशों ने भी इस हैवानित पर अपनी चिंता व्यक्त की। गृह मंत्री ने कहा, मैं इस बात पर बल देना चाहता हूं कि भारत का यह संदेश मानवता की खातिर और मानवाधिकार की सुरक्षा के लिए है। प्रमुख रूप से आतंकवाद ही मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन है।
पाकिस्तान में आतंकवादियों के सुरक्षित छिपे होने का स्पष्ट संदर्भ देते हुए सिंह ने कहा कि इच्छा शक्ति और बहिष्कृत तथा वांछित आतंकवादियों एवं उनके संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए और उसका कार्यान्वयन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षेस देशों के गृह मंत्रियों की बैठक में भारत ने एसटीओएमडी और एसडीओएमडी को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए तकनीकी सहायता की पेशकश की। उन्होंने कहा कि 22 और 23 सितंबर को भारत में सार्क एंटी टेरेरिज्म मैकेनिजम के विशेषज्ञों की बैठक का आयोजन होगी और सभी सदस्य देशों में इस बैठक में हिस्सा लेने पर सहमति जताई है।
उन्होंने कहा कि भारत ने नशीले पदाथो की रोकथाम के लिए दक्षेस के सदस्य देशों के अधिकारियों को विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण देने की पेशकश की है। साथ ही दक्षेस देशों की कंप्यूटर इमर्जेन्सी रिस्पॉन्स टीम की पहली बैठक भारत में आयोजित करने का भी प्रस्ताव है। सिंह के अनुसार, उन्होंने दक्षेस मंत्रियों को भारत सरकार द्वारा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए की गई पहलों तथा वित्तीय समावेशन की जनधन योजना और आधार योजना के बारे में भी बताया।