नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि रिजर्व बैंक बाजार स्थिति का आकलन करने के बाद नकदी निकासी पर पाबंदी हटाएगा। साथ ही उन्होंने प्रवासी भारतीयों और विदेशों से लौटे नागरिकों को छोड़कर अन्य पर पुराने प्रतिबंधित नोट जमा करने पर रोक के केंद्रीय बैंक के निर्णय में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। यह पूछे जाने पर कि नकद निकासी पर पाबंदी कब हटेगी, उन्होंने कहा, रिजर्व बैंक बाजार स्थिति का आकलन करने के बाद इस बारे में फैसला करेगा। कई बार कार्यवाही चरणों में की जाती है, इसीलिए छूट भी चरणों में दी जा रही है।
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फिलहाल एक खाताधारक को बैंक शाखाओं से एक सप्ताह में 24,000 रुपये निकालने तथा एटीएम से 4,500 रुपये प्रतिदिन निकालने की अनुमति है। पुराने प्रतिबंधित 500 और 1,000 रुपये के नोट जमा करने और उसे बदलने के लिये मिली छूट 30 दिसंबर को समाप्त हो गयी। यह पूछे जाने पर कि हो सकता है कुछ वास्तविक कारणों से लोग सुविधा का लाभ नहीं उठा सके वित्त मंत्री ने कहा कि सुविधा सभी के लिये उपलब्ध थी और वह रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित मानदंडों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे।
उन्होंने मोहलत अवधि के दौरान पैसा जमा करवा पाने या उसे बदल पाने में विफल लोगों को कुछ भी राहत देने को लेकर प्रतिबद्धता जताये बिना कहा, बड़ी संख्या में लोग पहले ही अपने नोट बदल चुके हैं। कुछ ही बचें हैं...जो भी कारण हो हम इस पर गौर नहीं करेंगे। रिजर्व बैंक ने मानदंड तय किये हैं। कम-से-कम मैं उस मानदंड का सम्मान करता हूं।
यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भी कहा कि लोगों के पास 31 मार्च तक रिजर्व बैंक की चुनिंदा शाखाओं में पुराने प्रतिबंधित नोट जमा करने का अवसर होगा, जेटली ने कहा, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि रिजर्व बैंक इस संबंध में नियम एवं शर्तें तय करेगा।
प्रधानमंत्री ने आठ नवंबर को कहा था, कुछ लोग हो सकते हैं जो किसी कारण से 30 दिसंबर 2015 तक पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट नहीं जमा करवा पायें। वे रिजर्व बैंक के निर्धारित कार्यालयों में जाकर 31 मार्च 2017 तक घोषणा फार्म भरकर रुपये जमा करवा सकते हैं। रिजर्व बैंक के नियम एवं शतो के तहत प्रवासी भारतीय तथा विदेशों से लौटे भारतीय हवाई अड्डे पर पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट दिखाकर उनसे स्टांप लगा घोषणा फार्म ले सकते हैं तथा उसके बाद रिजर्व बैंक में वह राशि जमा करा सकते हैं।
जो भारतीय नौ नवंबर से 30 दिसंबर तक विदेश में थे, उनके लिये 31 मार्च तक की मोहलत दी गयी है जबकि प्रवासी भारतीयों के लिये छूट 30 जून तक के लिये है। मोहलत अवधि के दौरान विदेश में रहे भारतीय नागरिकों के लिये पुराने प्रतिबंधित नोट जमा करने की कोई सीमा नहीं है लेकिन एनआरआई फेमा कानून के प्रावधान के तहत केवल 25,000 रुपये जमा करा सकते हैं।
जेटली ने यह भी कहा कि नोटबंदी से राज्यों के राजस्व संग्रह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा, विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों ने दिसंबर राजस्व के बारे में अपना स्वयं का अनुमान दिया है जो नवंबर में संग्रह राशि से जुड़ा है। उनमें से कइयों (पंजाब, हरियाणा, असम) ने पूरा ब्योरा दिया है कि कैसे उन राज्यों में राजस्व बढ़ा है। जेटली ने कहा, हमने राज्यों से इस संबंध में आंकड़ा और साथ ही पिछले दो-तीन साल का तुलनात्मक आंकड़ा उपलब्ध कराने को कहा है ताकि हम मासिक आधार पर प्रतिरूप देख सके।