Thursday, January 08, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. शिवगिरि मठ के पूर्व प्रमुख स्वामी प्रकाशानंद का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

शिवगिरि मठ के पूर्व प्रमुख स्वामी प्रकाशानंद का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

शिवगिरि मठ के पूर्व प्रमुख एवं राज्य के सबसे पुराने आध्यात्मिक गुरुओं में से एक स्वामी प्रकाशानंद का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण वरकला में निधन हो गया।

Reported by: Bhasha
Published : Jul 07, 2021 06:32 pm IST, Updated : Jul 07, 2021 06:32 pm IST
Swami Prakashananda, Swami Prakashananda Kerala, Swami Prakashananda Modi- India TV Hindi
Image Source : PTI अपने शोक संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी प्रकाशानंद की ज्ञान एवं आध्यात्म के प्रतीक के रूप में सराहना की।

वरकला: शिवगिरि मठ के पूर्व प्रमुख एवं राज्य के सबसे पुराने आध्यात्मिक गुरुओं में से एक स्वामी प्रकाशानंद का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण वरकला में निधन हो गया। वह 99 वर्ष के थे। मठ के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि संत- विद्वान स्वामी प्रकाशानंद ने यहां श्री नारायण मिशन अस्पताल में अंतिम सांस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत अन्य ने आध्यात्मिक गुरु के निधन पर शोक प्रकट किया।

‘स्वामी प्रकाशानंद जी ज्ञान एवं आध्यात्म के प्रतीक थे’

अपने शोक संदेश में मोदी ने स्वामी प्रकाशानंद की ज्ञान एवं आध्यात्म के प्रतीक के रूप में सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया, ‘स्वामी प्रकाशानंद जी ज्ञान एवं आध्यात्म के प्रतीक थे। उनके सेवा के नि:स्वार्थ भाव ने गरीब से गरीब को सशक्त किया। उन्होंने श्री नारायण गुरु के नेक विचारों को लोकप्रिय बनाने का बीड़ा उठाया। उनके निधन से दुखी हूं। ओम शांति।’ लंबी अवधि तक श्री नारायण धर्म संगम ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे, प्रकाशानंद ने 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध संत-समाज सुधारक श्री नारायण गुरु द्वारा स्थापित शिवगिरि मठ को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित आध्यात्मिक केंद्र में परिवर्तित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।


बाद में स्वामी शंकरानंद के शिष्य बन गए थे प्रकाशानंद
श्री नारायण धर्म संगम गुरु द्वारा स्थापित एक संगठन था जिसके जरिए वह अपनी विचारधाराओं का प्रचार करते थे खासकर ‘एक जाति, एक धर्म और मनुष्य के लिए एक ईश्वर’ होने के अपने प्रशंसित दर्शन का। गुरु के आदर्शों एवं दृष्टिकोणों के प्रचार में पूरा जीवन समर्पित करने वाले प्रकाशानंद को उनकी सादगी, अटल भक्ति, नि:स्वार्थ सेवा और दृढ़ संकल्प के लिए जाना जाता है। वह बाद में स्वामी शंकरानंद के शिष्य बन गए थे जिनसे उन्होंने 35 वर्ष की उम्र में ‘दीक्षा’ ली थी। वह 1970 में ट्रस्ट के महासचिव बने और फिर 1995-97 के दौरान पहली बार इसके अध्यक्ष बने। वह 2006 में फिर से इसके अध्यक्ष बने और तब से 10 वर्षों तक गुरु के शिष्यों का नेतृत्व किया।

प्रकाशानंद मौन व्रत के लिए भी खबरों में रहे
मठ के विकास एवं गुरु के दृष्टिकोण के प्रचार की विभिन्न पहलों के अलावा, प्रकाशानंद मौन व्रत के लिए भी खबरों में रहे जिसका उन्होंने 1980 के दशक में लगभग 9 वर्षों तक अभ्यास किया। 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में उन्होंने मठ का प्रशासन लेने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ तिरुवनंतपुरम में सचिवालय के सामने कई दिनों की भूख हड़ताल से भी सुर्खियां बटोरी थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वामी प्रकाशानंद के निधन को ‘दुखद’ बताया। राज्यपाल खान ने स्वामी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा ‘नि:स्वार्थ आध्यात्मिक गुरु के तौर पर उन्होंने अपना पूरा जीवन श्री नारायण गुरु के प्रचार में समर्पित किया। उनकी आत्मा को मुक्ति मिले।’

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी जताया शोक
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि प्रकाशानंद विशेष प्रकार के आध्यात्म के हिमायती थे जो मानवता की भव्यता और भिक्षुओं के बीच एक आदर्श पर जोर देता है। उन्होंने स्वामी के निधन को प्रगतिशील केरल के लिए ‘अपूर्णीय क्षति’ बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने प्रकाशानंद को समाज के प्रति कड़ी प्रतिबद्धता रखने वाला आध्यात्मिक गुरु बताया। मठ के सूत्रों ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार आज शाम किया जा सकता है।

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement