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Al Falah Terror Funding: अमोनियम नाइट्रेट और हथियारों के लिए अल फलाह के डॉक्टर कहां से लाए 26 लाख रुपये, किसकी थी क्या जिम्मेदारी?

 Reported By: Abhay Parashar, Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Nov 22, 2025 11:36 am IST,  Updated : Nov 22, 2025 11:36 am IST

Faridabad Terror Network: बम विस्फोट के लिए अल फलाह टेरर नेटवर्क से जुड़े डॉक्टर्स ने पैसों का इंतजाम कैसे किया था। उनको किसने 26 लाख रुपये दिए थे। पूछताछ में इसको लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।

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अल फलाह से जुड़े डॉक्टरों ने धमाके के लिए की सेल्फ फंडिंग। Image Source : REPORTER'S INPUT

नई दिल्ली: अल फलाह यूनिवर्सिटी टेरर नेटवर्क से जुड़े डॉक्टर्स ने धमाके के लिए 26 लाख रुपये कैसे इकट्ठा किए थे, इसका राज खुल गया है। जांच में पता चला है कि ब्लास्ट के लिए डॉक्टर्स ने सेल्फ फंडिंग की थी। आतंकी फंड में डॉक्टर मुजम्मिल ने 5 लाख, डॉक्टर आदिल अहमद राथर ने 8 लाख, डॉक्टर मुफ्फर अहमद राथर 6 लाख, डॉक्टर उमर ने 2 लाख और डॉ शाहीना शाहिद ने 5 लाख रुपये जमा किए थे। इन सभी ने मिलकर कुल 26 लाख रुपये कैश में जमा किए थे और फिर उस फंड को डॉक्टर उमर को दे दिया था।

किस डॉक्टर के पास थी क्या जिम्मेदारी?

बता दें कि फंड के लिए जमा किए गए पैसों से अमोनियम नाइट्रेट और यूरिया खरीदने की जिम्मेदारी मुजम्मिल की थी। मुजम्मिल ने 3 लाख रुपये में NPK खाद खरीदी थी। इस खाद को विस्फोटक में तब्दील करने की जिम्मेदारी डॉक्टर उमर मोहम्मद की थी। उमर मोहम्मद को ही विस्फोट के लिए केमिकल, रिमोट और डिवाइस अरेंज करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

विस्फोटक जमा करने में लगा कितना समय?

आतंकी मुजम्मिल ने जांच एजेंसी के सामने कबूला कि साल 2023 में दिल्ली और कई शहरों में ब्लास्ट की साजिश रची थी। दो साल से ब्लास्ट के लिए विस्फोटक का इंतजाम कर रहे थे। वे पिछले दो साल से विस्फोटक, रिमोट और अन्य डिवाइस इकट्ठा कर रहे थे।

क्या हमास का पैटर्न फॉलो कर रहे थे आतंकी?

सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर में अस्पतालों और कुछ गेस्ट हाउस की आतंकी मुजम्मिल और उमर रेकी कर चुके थे। हमास की ट्रेनिंग और हमास के टनल से जुड़े कई वीडियो इन आतंकियों के फोन से रिट्रीव किए गए हैं। बरामद वीडियो के बारे में आतंकियों से उनके मंसूबों के बारे में जानने की कोशिश की जा रही है कि हमास की तर्ज पर हथियारों को छिपाने के लिए लोकल अस्पतालों और गेस्ट हाउस का इस्तेमाल करने की साजिश तो नहीं चल रही थी।

अल फलाह के छात्रों का कैसे कर रहे थे ब्रेनवॉश?

मुजम्मिल और उमर को कश्मीर के लोकल छात्रों को रेडिक्लाजड करने के आदेश जैश की तरफ से दिए जाते थे। सूत्रों के मुताबिक, अल फलाह यूनिवर्सिटी में कश्मीरी छात्रों के साथ मुजम्मिल और उमर ने एक टेलीग्राम ग्रुप बनाया था जिसमें सिर्फ कश्मीर के छात्र शामिल थे। यूनिवर्सिटी कैंपस की लैब, अस्पताल एरिया, कश्मीरी स्टूडेंट्स, कैंपस की सिक्योरिटी में रहने वाले गार्ड्स सबके रिकार्ड्स डिटेल्स खंगाली जा रही हैं।

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