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Axiom Mission 4: कितनी चुनौती भरी होगी शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा, वहां क्या कुछ करेंगे? स्पेस एक्सपर्ट से जानिए

 Reported By: T Raghavan Edited By: Subhash Kumar
 Published : Jun 10, 2025 09:01 pm IST,  Updated : Jun 10, 2025 11:25 pm IST

Axiom-4 Mission 11 जून को लॉन्च होने जा रहा है। इस अंतरिक्ष मिशन में भारत के शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं। आइए जानते हैं कि कितनी चुनौती भरी होगी शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा।

AXIOM 4 MISSION SHUBHANSHU SHUKLA- India TV Hindi
एक्सिओम 4 मिशन पर बोले एक्सपर्ट प्रोफ़ेसर RC कपूर। Image Source : INDIA TV

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए एक्सिओम-4 (Axiom-4 ) मिशन 11 जून को अंतरिक्ष के लिए रवाना होने जा रहा है। उम्मीद है कि शाम करीब 5:30 बजे लॉन्चिंग होगी। आपको बता दें कि एक्सिओम-4 मिशन में चार देशों के चार अंतरिक्ष यात्री 14 दिन के लिए स्पेस स्टेशन जाएंगे। इस मिशन में एक एस्ट्रोनॉट भारत के भी हैं जिनका नाम शुभांशु शुक्ला है। शुभांशु शुक्ला को अंतरिक्ष में भारत के पहले मानव मिशन गगनयान के लिए भी चुना गया है। तो आखिर एक्सिओम-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला का रोल क्या होगा? उनकी इस यात्रा से गगनयान मिशन में क्या फायदा मिलेगा? एक्सिओम-4 मिशन में अंतरिक्ष यात्री कौन से प्रयोग करेंगे और उनकी ये यात्रा कितनी चुनौतीपूर्ण होगी? इन सभी सवालों को लेकर India TV ने स्पेस एक्सपर्ट प्रोफेसर R C कपूर के साथ बातचीत की है। आइए जानते हैं उन्होंने एक्सिओम-4 मिशन और शुभांशु शुक्ला को लेकर क्या कुछ कहा है।

स्पेस में क्या कुछ करेंगे शुभांशु शुक्ला?

स्पेस एक्सपर्ट प्रोफेसर RC कपूर ने जानकारी दी है कि Axiom-4 मिशन में विभिन्न एजेंसियों की तरफ से 60 से ज्यादा एक्सपेरिमेंट होने हैं। भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी 7 एक्सपेरिमेंट्स करेंगे। इसरो की तरफ से नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के साथ मिलकर कुछ एक्सपेरिमेंट्स होने हैं जो कि काफी अहम हैं। प्रोफेसर RC कपूर ने बताया है कि शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष यात्रा के दौरान 7 माइक्रो ग्रेविटी बेस्ड प्रयोगों को अंजाम देंगे।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का चयन कितना अहम है?

स्पेस एक्सपर्ट प्रोफेसर RC कपूर ने कहा है कि एक्सिओम के चौथे मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला शामिल हैं जो कि खुशी की बात है। गगनयान मिशन के लिए साल 2020 में 60 लोग शॉर्टलिस्ट हुए थे। लेवल 1 की परीक्षा के बाद 12 लोगों को सिलेक्ट किया गया और उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई। इनमें से फाइनल प्रोसेस में 4 अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया गया जिसमें से एक ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी हैं। प्रोफेसर RC कपूर ने कहा कि ये भारत, इसरो और शुभांशु शुक्ला के लिए एक शानदार अनुभव होने जा रहा है।

गगनयान में कैसे काम आएगा Axiom मिशन का अनुभव?

प्रोफेसर RC कपूर ने जानकारी दी है कि शुभांशु शुक्ला जब गगनयान में जाएंगे तो ये अनुभव आगे के लिए काफी काम का होगा। अब तक जो तैयारी थी वो गगनयान को लेकर थी। वो हमारा अपना बनाया हुआ मिशन है। एक्सिओम में स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन है। उसकी मैकेनिज्म के साथ फैमिलियर होना चाहिए। शुभांशु शुक्ला वहां रहे हैं और उन्होंने इसकी ट्रेनिंग हासिल की है ताकि विभिन्न ऑपरेशन में भागीदारी कर सके। शुभांशु शुक्ला को इस अंतरिक्ष यात्रा के बाद गगनयान मिशन में भी फायदा मिलेगा। वह अपने अनुभव को साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ भी साझा करेंगे।

स्पेस ऑपरेशन को फ्रेजाइल क्यों कहा जाता है?

स्पेस ऑपरेशन को एक काफी फ्रेजाइल यानी कि रिस्की मिशन माना जाता है। यहां एक छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान कर सकती है। प्रोफेसर RC कपूर ने बताया है कि बड़ी संख्या में चीजों को ठीक से काम करना होता है तब जाकर आप अंतरिक्ष में पहुंचते हैं। एक चूक सारी चीजों को मटियामेट कर सकती है। अंतरिक्ष में रेडिएशन होता है जो कि सूर्य की ओर से प्रमुख तौर पर आता है। यहां कई रिएक्शन होते हैं जो कि हमारी संचार व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। रेडिएशन के प्रति हर अंतरिक्ष यात्री एक्सपोज है। अंतरिक्ष यात्री हजार दिन से ज्यादा वहां नहीं रह सकते।

स्पेस मिशन में क्या होंगी चुनौतियां?

स्पेस स्टेशन में अंतरिक्ष यात्री स्पेस सूट में नहीं होते हैं। हमारे 24 घंटे में स्पेस स्टेशन 15.7 बार पृथ्वी के चक्कर लगा लेता है। ये 27724 किमी प्रति घंटे के रफ्तार से चल रहा होता है। अंतरिक्ष यात्री इसके अंदर हैं तो उन्हें ये महसूस नहीं होता। उस माइक्रोग्रैविटी के वातारवरण में सबसे पहला प्रभाव हमारे मांसपेशियों पर पड़ता है। अंतरिक्ष यात्रा के दौरान इन्हें काफी घंटों तक एक्सरसाइज करना पड़ता है। ऐसे हम अपनी मांसपेशियों को बचाते हैं। न्यूट्रिशन की बात करें तो खाना यहां से अपनी पसंद का जाता है। गगनयान मिशन के लिए मैसूर की डिफेंस फूड रिसर्च लैबोरेटरी ने शानदार लिस्ट बनाई है। जो नॉर्मल कैफे में मिलता है वही चीजें तैयार की गई हैं- उपमा, बिरयानी, इडली, हलवा आदि।

न्यूट्रैशनल फूड और सलाद के बीज पर प्रयोग से क्या फायदा होगा?

प्रोफेसर RC कपूर ने बताया है कि Axiom-4 मिशन में स्पेस में सैलड के बीज को अंकुरित करने का प्रयोग होने की उम्मीद है। इस पर उन्होंने कहा कि अपने लिए खाना अगर हम खुद से पैदा कर सके तो, आप जान चुके हैं कि स्पेस स्टेशन में फूल खिला था। पिज्जा बनाया गया था। ग्रीन ग्रैम और मेथी के बीज भेजे जा रहे हैं। इनको वहां स्प्राउट किया जाएगा और फिर आने वाले समय में वापस लेकर आएंगे। हमें देखना है कि जेनेटिक्स में क्या चेंज हो सकता है। ये सब 14 दिन के अंदर होना है। बीज पर क्या प्रभाव पड़ता है उसे देखना है। एक एटाडी ग्रेड्स माइक्रो ऑर्गनिज्म भी भेजा जा रहा है जो कि हाफ मिलिमीटर से 1.5 मिलिमीटर के आकार का है। ये दुनिया का सबसे ज्यादा जीवट वाला ऑर्गनिज्म है जो कि डी-हाईड्रेशन की स्थिति में भी रह लेगा। ये मनुष्य के मुकाबले हजार गुना अल्ट्रावायोलेट एमिशन को सहन कर सकता है। ये काफी अहम है। माइक्रो एल्गी का भी प्रयोग है। वह फूड सप्लिमेंट का काम कर सकते हैं। तो 'ग्रो योर ओन फूड' के तहत इसका अध्ययन किया जाएगा। इसमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस समेत कई अन्य लैबोरेटरी शामिल है।

प्रोफेसर RC कपूर ने बताया कि Axiom-4 मिशन में हर अंतरिक्ष यात्री का अपना एक रोल है। स्पेस स्टेशन में पहुंच के कई प्रयोग करने हैं। डेली रूटीन का बड़ा हिस्सा एक्सरसाइज में जाने वाला है। जो समय बचता है उसमें उन्हें एक्सपेरिमेंट करना हैं। इसे हम सीख के जाते हैं। स्पेस स्टेशन में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत है। ये भी बताया जाएगा कि पानी की बचत कैसे करें।

इसरो के लिए भारत रत्न की मांग

गगनयान के लिए इस समय इसरो के साथ डीआरडीओ समेत 650 इंडस्ट्री शामिल हैं। छोटी से लेकर देश की बड़ी से बड़ी इंडस्ट्री इसरो के साथ है। ये एक महान प्रगति है जिसपर हमें गर्व होना चाहिए और भारत रत्न इसरो को मिलना चाहिए। आपको बता दें कि भारत का गगनयान मिशन 2027 में प्रस्तावित है। 

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