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'इतना भावुक क्यों हो रहे...', शशि थरूर को राहत देते हुए बोला सुप्रीम कोर्ट, पीएम मोदी पर की थी टिप्पणी, जानिए पूरा मामला

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj Published : Aug 01, 2025 02:57 pm IST, Updated : Aug 01, 2025 03:05 pm IST

बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने थरूर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इसमें दावा किया गया कि थरूर की टिप्पणी ने उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई और पीएम मोदी और बीजेपी की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर- India TV Hindi
Image Source : PTI कांग्रेस सांसद शशि थरूर

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कथित ‘शिवलिंग पर बिच्छू’ वाली टिप्पणी के लिए कांग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर लगी रोक शुक्रवार को बढ़ा दी। सुप्रीम कोर्ट ने रोक बढ़ाते हुए शिकायतकर्ता के वकील से यह भी कहा कि ‘इतना भावुक क्यों हो रहे हैं’। सुप्रीम कोर्ट के जज एमएम सुंदरेश और जज एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने थरूर के वकील के अनुरोध पर मामले की सुनवाई स्थगित करने के बाद यह आदेश पारित किया।

कोर्ट ने कहा- चलिए इसे बंद कर देते हैं...

शिकायतकर्ता, बीजेपी नेता राजीव बब्बर की ओर से पेश हुए वकील ने मुख्य कार्यवाही दिवस पर सुनवाई की मांग की। पीठ ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर के लिए निर्धारित करते हुए कहा, ‘क्या विशेष कार्यवाही दिवस? आप इस सब को लेकर इतने भावुक क्यों हैं? चलिए, इसे बंद कर देते हैं।’

जानिए थरूर के वकील ने क्या दिया था तर्क?

थरूर ने दिल्ली हाई कोर्ट के 29 अगस्त, 2024 के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए उन्हें 10 सितंबर को निचली अदालत में पेश होने को कहा था। थरूर के वकील ने पहले तर्क दिया था कि न तो शिकायतकर्ता और न ही राजनीतिक दल के सदस्यों को पीड़ित पक्ष कहा जा सकता है।

पत्रिका में प्रकाशित हुआ था लेख

वकील ने यह भी कहा कि थरूर की टिप्पणी मानहानि कानून के छूट वाले खंड के तहत संरक्षित है, जो यह निर्धारित करता है कि ‘सद्भावना’ से दिया गया कोई भी बयान आपराधिक नहीं है। इसमें कहा गया कि थरूर ने छह साल पहले कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का संदर्भ मात्र दिया था।

कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया था

सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया था कि 2012 में जब लेख मूल रूप से प्रकाशित हुआ था, बयान को मानहानिकारक नहीं माना गया था। न्यायमूर्ति रॉय ने पहले कहा था, ‘आखिरकार, यह एक रूपक है। मैंने समझने की कोशिश की है। यह उस व्यक्ति (मोदी) की अपराजेयता को दर्शाता है जिसका जिक्र किया गया है। मुझे नहीं पता कि किसी ने इस पर आपत्ति क्यों जताई है।’

'शिवलिंग पर बिच्छू’ जैसे आरोप

थरूर के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया, प्रधानमंत्री के खिलाफ ‘शिवलिंग पर बिच्छू’ जैसे आरोप ‘घृणित और निंदनीय’ हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया, इस टिप्पणी ने प्रधानमंत्री, भाजपा के साथ-साथ उसके पदाधिकारियों और सदस्यों की मानहानि की है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष थरूर को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि के लिए सजा) के तहत तलब करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है।

धार्मिक भावनाएं हुईं आहत 

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता की टिप्पणी से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। अक्टूबर 2018 में थरूर ने कथित तौर पर दावा किया था कि एक अनाम आरएसएस नेता ने मोदी की तुलना ‘शिवलिंग पर बैठे बिच्छू’ से की थी। कांग्रेस नेता ने कथित तौर पर कहा कि यह एक ‘असाधारण रूपक’ है। (भाषा के इनपुट के साथ)

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